उत्तर प्रदेश

बीएसटी बंधा क्षतिग्रस्त बाढ़ का खतरा बढ़ा

Kavita2
3 Sept 2026 11:52 AM IST
बीएसटी बंधा क्षतिग्रस्त बाढ़ का खतरा बढ़ा
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बलिया। बैरिया तहसील क्षेत्र में गंगा और सरयू नदी के दबाव को झेल रहे 31 किलोमीटर लंबे बीएसटी (बकुल्हा-संसार टोला बंधा) को लेकर खतरा बढ़ गया है। बुधवार रात हुई मूसलधार बारिश के कारण सेमरिया के पास तटबंध ऊपर से कट गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस समय गंगा नदी का बाढ़ का पानी तटबंध से काफी नीचे है। अगर नदी का जलस्तर तटबंध के करीब होता तो अचानक बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुस सकता था और गंभीर हालात पैदा हो सकते थे।

स्थानीय लोगों के अनुसार बीएसटी बंधा क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस तटबंध के एक तरफ गंगा नदी तो दूसरी ओर सरयू नदी का दबाव रहता है। दोनों नदियों के बीच स्थित यह क्षेत्र हर साल बाढ़ के खतरे का सामना करता है। ऐसे में तटबंध की मजबूती और उसकी निगरानी बेहद जरूरी मानी जाती है।

बीएसटी बंधा के दायरे में जयप्रकाश नगर, लालगंज, कर्ण छपरा, धतूरी टोला, दलन छपरा समेत 30 से अधिक गांव आते हैं। इन गांवों में करीब दो लाख की आबादी निवास करती है। ऐसे में तटबंध में किसी भी तरह की कमजोरी या टूट-फूट स्थानीय लोगों के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकती है।

ग्रामीणों के मुताबिक बुधवार रात तेज बारिश के बाद सेमरिया के पास तटबंध का ऊपरी हिस्सा कट गया। बारिश के पानी के दबाव से तटबंध की मिट्टी कमजोर हो गई और उसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि समय रहते इसकी जानकारी मिल गई, जिससे संभावित खतरे को लेकर प्रशासन और ग्रामीण सतर्क हो गए।

लोगों का कहना है कि अगर यह घटना उस समय होती जब गंगा नदी का जलस्तर तटबंध के बराबर या उसके आसपास होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। तटबंध टूटने की स्थिति में गंगा का पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ सकता था और बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित होना पड़ता।

बीएसटी बंधा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण पहले भी कई बार तटबंध की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि बारिश और बाढ़ के मौसम में तटबंध की नियमित निगरानी और मरम्मत जरूरी है। छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार गंगा और सरयू दोनों नदियों का दबाव इस क्षेत्र पर रहता है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ तटबंध पर दबाव भी बढ़ जाता है। इसलिए कमजोर स्थानों की पहचान कर समय रहते मरम्मत करना आवश्यक है।

तटबंध कटने की सूचना के बाद आसपास के ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। लोगों ने मौके की स्थिति को देखा और प्रशासन से जल्द मरम्मत कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के समय बीएसटी बंधा ही उनके गांवों की सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा है।

प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि आने वाले दिनों में यदि नदियों का जलस्तर बढ़ता है तो किसी बड़ी समस्या से बचा जा सके। बारिश के मौसम में नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी की जरूरत होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार नदी किनारे बने तटबंधों की मजबूती बनाए रखने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत जरूरी होती है। बारिश के दौरान मिट्टी का कटाव तटबंधों को कमजोर कर सकता है। यदि समय रहते इसकी रोकथाम नहीं की जाए तो अचानक टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

बीएसटी बंधा केवल एक तटबंध नहीं बल्कि हजारों परिवारों की सुरक्षा का माध्यम है। जयप्रकाश नगर सहित आसपास के गांवों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कृषि गतिविधियां इसी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि तटबंध की स्थायी मजबूती के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

गंगा और सरयू के बीच बसे इस क्षेत्र में हर साल बाढ़ की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन को मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। तटबंध की स्थिति पर नजर रखना और कमजोर हिस्सों को तुरंत ठीक करना बाढ़ नियंत्रण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।

फिलहाल गंगा का पानी तटबंध से नीचे होने के कारण बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन सेमरिया के पास कटाव ने भविष्य की चिंता जरूर बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते तटबंध की मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खतरा बढ़ सकता है।

दो लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र के लिए बीएसटी बंधा जीवन रेखा की तरह है। ऐसे में इसकी सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है। प्रशासन और संबंधित विभागों से उम्मीद की जा रही है कि जल्द कार्रवाई कर क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीणों को संभावित बाढ़ के खतरे से सुरक्षित रखा जाएगा।

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