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उत्तर प्रदेश
तीन राज्यों में अकेले दम पर उतरेगी बसपा मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया संदेश
Ratna Netam
25 Aug 2026 6:23 PM IST

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि बसपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।
मायावती ने मंगलवार को लखनऊ स्थित बसपा के केंद्रीय कार्यालय में पंजाब इकाई की समीक्षा बैठक के बाद यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी तीनों राज्यों में संगठन को मजबूत करके बेहतर चुनावी परिणाम हासिल करने की तैयारी कर रही है।
गठबंधन से नुकसान का दिया तर्क
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि चुनावी गठबंधन से पार्टी को कई बार सीटों और वोट प्रतिशत दोनों स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत लगाएं।
उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करेगी और ऐसे उम्मीदवारों को मौका देगी जो मेहनती, ईमानदार और जनता के बीच सक्रिय हों।
पंजाब में भी अकेले उतरने की तैयारी
मायावती ने खास तौर पर पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि बसपा वहां भी किसी पार्टी के साथ समझौता नहीं करेगी। पार्टी पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देगी।
बसपा का मानना है कि पंजाब की जनता मौजूदा राजनीतिक दलों से परेशान है और ऐसे में पार्टी को अपनी विचारधारा के साथ जनता के बीच जाना चाहिए।
यूपी और उत्तराखंड में भी बदली रणनीति
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बसपा पहले से ही अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। मायावती ने कहा कि इन राज्यों में भी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरती जाएगी।
उत्तर प्रदेश में बसपा के लिए विधानसभा चुनाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली है। अब पार्टी संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
2019 में सपा के साथ किया था गठबंधन
बसपा ने इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। उस चुनाव में बसपा को 10 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिली थीं।
हालांकि चुनाव के बाद मायावती ने सपा से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद बसपा ने अधिकतर चुनाव अकेले लड़ने की रणनीति अपनाई।
संगठन मजबूत करने पर जोर
मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए। इसके लिए बूथ कमेटियों को सक्रिय करने और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को चुनाव के लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़े और जनता तक बसपा की नीतियां पहुंचाई जा सकें।
उम्मीदवार चयन में होगी सावधानी
बसपा प्रमुख ने संकेत दिया है कि चुनाव में टिकट वितरण को लेकर विशेष सावधानी बरती जाएगी। पार्टी ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जिनकी जनता के बीच अच्छी छवि हो और जो संगठन के लिए लगातार काम कर रहे हों।
पार्टी का फोकस सामाजिक समीकरणों को साधने और अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने पर भी रहेगा।
राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा असर
बसपा के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। जहां विपक्षी दल गठबंधन की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं, वहीं बसपा ने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बसपा के अकेले मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
आगे की चुनौती
बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने जनाधार को वापस मजबूत करना होगी। पार्टी को युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने और संगठन को सक्रिय करने की जरूरत होगी।
मायावती का यह फैसला साफ संकेत देता है कि आगामी चुनावों में बसपा अपनी अलग पहचान और ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
अब देखना होगा कि अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति बसपा के लिए कितना फायदा लेकर आती है और तीनों राज्यों के चुनावी समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।
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