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हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है। परिवार रजिस्टर की नकल उपलब्ध कराने के बदले पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में ग्राम विकास अधिकारी को मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार दोपहर रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी पिछले एक महीने से आवेदक पर रकम देने का दबाव बना रहा था। रिश्वत की राशि सीधे मांगने के बजाय उसे 'दावत' का नाम दिया गया था। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने हापुड़ ब्लॉक कार्यालय में जाल बिछाया और आरोपी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए ग्राम विकास अधिकारी की पहचान सुशील खारी के रूप में हुई है। उन पर धौलाना थाना क्षेत्र के गांव सालेपुर कोटला निवासी सलमान राणा से परिवार रजिस्टर की नकल उपलब्ध कराने के एवज में पांच हजार रुपये मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह पिछले काफी समय से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनका काम नहीं हो रहा था।
सलमान राणा के मुताबिक, उन्हें किसी आवश्यक कार्य के लिए परिवार रजिस्टर की प्रमाणित नकल चाहिए थी। इसके लिए उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी से संपर्क किया। आरोप है कि अधिकारी ने दस्तावेज उपलब्ध कराने के बदले पांच हजार रुपये की मांग कर दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस रकम को अधिकारी ने दावत के खर्च के रूप में मांगा था।
बताया गया है कि शुरुआत में सलमान राणा ने बिना अतिरिक्त रकम दिए अपना काम कराने का प्रयास किया, लेकिन कथित रूप से उनसे लगातार पैसे मांगे जाते रहे। करीब एक महीने तक चली इस स्थिति से परेशान होकर उन्होंने एंटी करप्शन टीम से संपर्क करने का निर्णय लिया।
शिकायतकर्ता ने मेरठ की एंटी करप्शन टीम को पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिवार रजिस्टर की नकल जैसे सरकारी दस्तावेज को प्राप्त करने के लिए उनसे अवैध रकम मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद टीम ने मामले में कार्रवाई की योजना तैयार की।
मंगलवार दोपहर एंटी करप्शन टीम हापुड़ ब्लॉक कार्यालय पहुंची। टीम के सदस्यों ने पहले से तय योजना के अनुसार निगरानी शुरू की। आरोप है कि जैसे ही ग्राम विकास अधिकारी सुशील खारी ने शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये लिए, टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से रिश्वत के रूप में दिए गए पांच हजार रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई इस कार्रवाई से ब्लॉक कार्यालय में हलचल मच गई। एंटी करप्शन टीम आरोपी को अपने साथ ले गई और मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिश्वत का आरोप किसी बड़े ठेके, निर्माण कार्य या भुगतान को लेकर नहीं, बल्कि एक सामान्य सरकारी दस्तावेज की नकल उपलब्ध कराने से जुड़ा है। परिवार रजिस्टर ग्रामीण क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण अभिलेख माना जाता है। इसमें परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज रहती है।
परिवार रजिस्टर की नकल का उपयोग विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। कई बार पारिवारिक विवरण की पुष्टि, सरकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन और अन्य दस्तावेजी आवश्यकताओं के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में ग्रामीणों को समय पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने के दौरान होने वाली परेशानियों की ओर ध्यान खींचा है। कई ग्रामीणों को सरकारी प्रक्रियाओं और निर्धारित शुल्क की पूरी जानकारी नहीं होती। इसका फायदा उठाकर यदि कोई कर्मचारी अतिरिक्त रकम की मांग करता है, तो आवेदक के सामने कठिन स्थिति पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया, निर्धारित शुल्क और समयसीमा की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। कार्यालयों में सूचना बोर्ड लगाने और शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने से ऐसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने कथित रिश्वत की मांग को स्वीकार करने के बजाय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी की मदद ली। शिकायत के आधार पर की गई कार्रवाई यह संदेश देती है कि सरकारी कार्य कराने के बदले अवैध रकम मांगे जाने की स्थिति में नागरिक संबंधित एजेंसी से शिकायत कर सकते हैं।
हालांकि, किसी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का आरोप और अदालत में दोष सिद्ध होना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद मामले में जुटाए गए साक्ष्य, बरामद रकम और अन्य दस्तावेज आगे की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। आरोपी के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उसे कब न्यायालय में पेश किया जाएगा, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
हापुड़ जिले में इससे पहले भी भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई कर चुकी हैं। सितंबर 2026 में धौलाना तहसील से जुड़े एक अलग मामले में राजस्व निरीक्षक को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई थी। हालांकि, उस प्रकरण का वर्तमान मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध सामने नहीं आया है।
वर्तमान मामले में ग्राम विकास अधिकारी पर करीब एक महीने तक पैसे मांगने का आरोप विशेष रूप से गंभीर माना जा रहा है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह सरकारी सेवा प्रदान करने की प्रक्रिया में अनियमितता का मामला होगा।
फिलहाल मेरठ एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद यह मामला चर्चा में है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई और मामले में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।





