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उत्तर प्रदेश
नीला ड्रम हत्याकांड: साहिल-मुस्कान के खिलाफ अहम बनीं 22 गवाहियां
nidhi
15 Oct 2026 6:33 AM IST

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कोई चश्मदीद नहीं, फिर कैसे खुला सौरभ की हत्या का राज?
मेरठ: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 14 अक्टूबर को सजा का ऐलान किया। इससे पहले 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया गया था। मामले में हत्या के साथ साक्ष्य छिपाने और षड्यंत्र से जुड़े आरोपों पर सुनवाई हुई। सौरभ के परिजनों ने दोषियों के लिए कठोरतम सजा की मांग की थी।
इस मुकदमे में जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी प्रत्यक्षदर्शी का नहीं होना था। पुलिस को ऐसे साक्ष्य जुटाने थे, जिनसे वारदात से पहले की तैयारियों, हत्या और उसके बाद की गतिविधियों का संबंध स्थापित हो सके। इसलिए जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रही। आरोपियों के संपर्कों, खरीदारी और यात्रा से जुड़े लोगों तक पहुंचकर घटनाक्रम की पड़ताल की गई। मामले की विस्तृत रिपोर्ट में मुकदमे की कार्रवाई 64 दिन चलने का उल्लेख है। इस अवधि को पूरी पुलिस जांच की अवधि बताने से बचना जरूरी है।
सौरभ की हत्या का मामला मार्च 2025 में सामने आया था। मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित इंदिरा नगर के घर में रखे नीले ड्रम से उनका शव बरामद हुआ। शव को सीमेंट के बीच छिपाया गया था। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल की भूमिका की जांच आगे बढ़ाई। सौरभ की गुमशुदगी और हत्या की आशंका से शुरू हुई पड़ताल में घर के भीतर मिले साक्ष्य महत्वपूर्ण बने। इसी नीले ड्रम की बरामदगी के कारण मामला देशभर में इसी नाम से चर्चित हुआ।
अभियोजन के अनुसार, सौरभ को नींद की दवा देकर बेहोश करने के बाद उनकी हत्या की गई। इसके बाद शव को छिपाने की कोशिश हुई। वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे। जांच में दोनों की यात्रा से जुड़े विवरण भी शामिल किए गए। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम को अदालत के सामने रखा। दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य नष्ट करने समेत अन्य आरोपों में चार्जशीट दाखिल की गई।
अदालत में पेश किए गए गवाहों में संबंधित सामान बेचने वाले दुकानदार भी शामिल थे। चाकू बेचने वाले दुकानदार ने खरीदारी के बारे में बयान दिया। ड्रम विक्रेता ने नीला ड्रम बेचे जाने की पुष्टि की, जबकि सीमेंट कारोबारी ने बालू और सीमेंट की बिक्री के संबंध में गवाही दी। इन बयानों के जरिए अभियोजन ने अलग-अलग स्थानों से खरीदे गए सामान को मामले से जोड़ा। खरीदारी से जुड़े विवरण इसलिए अहम थे क्योंकि इनके माध्यम से शव छिपाने में इस्तेमाल सामग्री तक पहुंचने का क्रम सामने रखा गया।
अभियोजन पक्ष ने लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट और 22 गवाहों के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के नेतृत्व में अदालत के सामने सबूत पेश किए गए। अभियोजन ने अपराध की परिस्थितियों और साक्ष्य छिपाने के तरीके का उल्लेख करते हुए कठोरतम सजा मांगी। ड्रम खोलने की प्रक्रिया से जुड़े मजदूर की गवाही भी मुकदमे का हिस्सा बनी। इस तरह बरामदगी, सामान की खरीद और वैज्ञानिक जांच से मिले तथ्यों को अलग-अलग गवाहों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान मुस्कान और साहिल को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिला। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत में सवाल-जवाब के दौरान दोनों ने आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद अंतिम बहस हुई और अदालत ने 30 सितंबर को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया। सजा पर निर्णय के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई। बुधवार को दोनों को मृत्युदंड सुनाए जाने के साथ इस मामले में निचली अदालत की सजा संबंधी कार्यवाही पूरी हुई। abplive.com
सौरभ हत्याकांड में अदालत तक पहुंची कहानी केवल नीले ड्रम की बरामदगी तक सीमित नहीं थी। गवाहों के बयान, खरीदारी के विवरण, यात्रा की पड़ताल और वैज्ञानिक साक्ष्य अभियोजन के प्रमुख आधार रहे। किसी चश्मदीद के अभाव में इन्हीं तथ्यों के जरिए आरोप साबित करने का प्रयास किया गया। अदालत ने दोनों को दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई। इस फैसले के साथ सौरभ की हत्या से जुड़े मुकदमे में महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पूरा हुआ।
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