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लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष सोमवार को लखनऊ पहुंचेंगे। उनके इस दौरे को उत्तर प्रदेश की सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुल्तानपुर में प्रस्तावित काशी क्षेत्र की भाजपा-संघ समन्वय बैठक से पहले बीएल संतोष लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है, जब भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
भाजपा ने अभी तक अपने राज्यसभा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान नहीं किया है। राज्यसभा चुनाव के लिए छह अक्तूबर को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। ऐसे में उम्मीदवारों के नाम तय करने और उनकी घोषणा के लिए पार्टी के पास अब बेहद कम समय बचा है। इसी बीच बीएल संतोष का लखनऊ पहुंचना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी की ओर से प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं होने के कारण सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि भाजपा की ओर से अभी किसी संभावित उम्मीदवार के नाम की पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण पार्टी कभी भी अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक कर सकती है।
बीएल संतोष भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी मुलाकात पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। मुलाकात में राज्यसभा चुनाव से जुड़े विषयों के साथ उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है।
लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बीएल संतोष सुल्तानपुर में आयोजित काशी क्षेत्र की भाजपा-संघ समन्वय बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक को भी संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा और संघ के बीच विभिन्न मुद्दों पर नियमित रूप से समन्वय बैठकें होती हैं, जिनमें संगठन से जुड़े विषयों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की जाती है।
बीएल संतोष का यह दौरा राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के समय होने के कारण ज्यादा चर्चा में है। भाजपा में बड़े चुनावों और महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों से पहले केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श की प्रक्रिया होती है। ऐसे में लखनऊ में होने वाली बैठक में किन विषयों पर चर्चा होती है, इसे लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह उत्सुकता बनी हुई है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख छह अक्तूबर होने के कारण उम्मीदवारों को नामांकन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए भी पर्याप्त समय देना होगा। यही वजह है कि भाजपा की सूची का इंतजार अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रत्याशियों के नाम घोषित होते ही नामांकन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
भाजपा की ओर से अभी तक उम्मीदवारों के नाम सामने नहीं आने के कारण पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर हैं। राज्यसभा की सीट को लेकर पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है, यह घोषणा के बाद ही साफ होगा। फिलहाल संभावित नामों को लेकर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण सभी की नजर भाजपा की औपचारिक सूची पर है।
उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य है। केंद्र की राजनीति में भी प्रदेश की भूमिका बड़ी मानी जाती है। ऐसे में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन केवल सदन की संख्या तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके जरिए संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी की जाती है। हालांकि इस बार पार्टी की रणनीति क्या होगी, यह प्रत्याशियों के नाम घोषित होने के बाद स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीएल संतोष की मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय संगठन महासचिव को सुल्तानपुर में भाजपा-संघ समन्वय बैठक में हिस्सा लेना है। इस दौरान प्रदेश में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति और आगामी कार्यक्रमों से संबंधित विषय भी चर्चा में आ सकते हैं।
नामांकन की समय सीमा करीब आने के साथ भाजपा नेतृत्व पर प्रत्याशियों की सूची जारी करने की समयबद्धता भी महत्वपूर्ण हो गई है। छह अक्तूबर को अंतिम दिन होने के कारण पांच अक्तूबर को उम्मीदवारों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सूची कब जारी होगी, इसे लेकर पार्टी की ओर से आधिकारिक समय नहीं बताया गया है।
अब राजनीतिक नजरें बीएल संतोष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात के साथ भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची पर टिकी हैं। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि पार्टी ने किन चेहरों पर दांव लगाया है और चयन में किन राजनीतिक तथा संगठनात्मक समीकरणों को प्राथमिकता दी गई है।





