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Drugs के खिलाफ भाकियू का मोर्चा, प्रशासन को दो दिन का दिया समय

grow old बुढ़ाना : बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव जौला में नए शराब ठेके के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को गांव में आयोजित विशाल पंचायत में ग्रामीणों ने शराब ठेका हटाने की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया। भाकियू नेताओं ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग को चेतावनी दी कि गांव की सामाजिक व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से किसी भी कीमत पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान शामिल हुए। इस दौरान भाकियू जिला महासचिव अनुज बालियान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गांव में शराब का ठेका खुलने से युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ेगा और सामाजिक माहौल खराब होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ठेका बंद नहीं किया गया तो भाकियू के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अनुज बालियान ने कहा कि जरूरत पड़ी तो किसान बुढ़ाना एसडीएम कार्यालय का घेराव करेंगे और तहसील का कामकाज ठप करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि गांव के लोग किसी भी हालत में शराब ठेका संचालित नहीं होने देंगे।
पंचायत की जानकारी मिलने के बाद आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। आबकारी निरीक्षक विकास चौधरी, महेश नंदन लाल और गढ़ी चौकी इंचार्ज नीरज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और भाकियू नेताओं से बातचीत कर मामले को शांत करने का प्रयास किया।
अधिकारियों ने शुरुआत में जांच और निर्णय के लिए 15 दिन का समय मांगा। इस पर भाकियू नेताओं ने कहा कि प्रशासन को समय दिया जा सकता है, लेकिन इस दौरान ठेका किसी भी स्थिति में संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि जांच पूरी होने तक शराब ठेके को तत्काल बंद रखा जाए।
काफी देर तक चली वार्ता और गहमागहमी के बाद आबकारी विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर जौला गांव में खोले गए शराब ठेके को बंद कर दिया जाएगा और इसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद भाकियू ने फिलहाल अपना आंदोलन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया।
महापंचायत में पूर्व ब्लॉक प्रमुख विनोद मलिक, ग्राम प्रधान जमशेद, संजीव पंवार, विकास त्यागी, जब्बार, मोमिन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि गांव में नशाखोरी को बढ़ावा देने वाले किसी भी कदम का विरोध जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शराब की दुकान खुलने से युवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में भी ऐसे निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों की राय ली जाए। वहीं प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया है।





