- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- PDA के बदलते मायने पर...
उत्तर प्रदेश
PDA के बदलते मायने पर बीजेपी का तंज, केशव ने अखिलेश को घेरा
Ratna Netam
6 Aug 2026 8:43 PM IST

x
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर **पीडीए (PDA)** को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा पीडीए की नई व्याख्या किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री **केशव प्रसाद मौर्य** ने अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले को “रंग बदलने वाला” बताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का यह नारा केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा का असली पीडीए “परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी” है, जिसका केंद्र केवल सैफई है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने हाल ही में जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोगों को आमंत्रित किया था। इस कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए में “पीडी” का अर्थ **“पंडित”** भी है। इससे पहले वे अलग-अलग मौकों पर पीडीए के “पी” का मतलब पिछड़ा, पीड़ित और प्रेम भी बता चुके हैं। अखिलेश के इस नए बयान को भाजपा ने राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए निशाना बनाया।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए अब एक ऐसी पहेली बन गया है, जो गिरगिट की तरह बार-बार अपना रंग बदलती है। कभी पिछड़ा, कभी पीड़ित, कभी प्रेम और अब पंडित। उन्होंने कहा कि वास्तव में सपा का पीडीए “परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी” है, जिसका उद्देश्य केवल एक परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाना है।
केशव मौर्य ने आगे आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पिछड़ों, दलितों या ब्राह्मणों की नहीं, बल्कि अपराधियों, माफियाओं, दंगाइयों और भ्रष्टाचारियों की राजनीति करने वाली पार्टी रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब ऐसे नारों और राजनीतिक प्रयोगों को समझ चुकी है। उनके अनुसार, समाज अब विकास, सुशासन और सुरक्षा की राजनीति चाहता है, न कि जातीय समीकरणों के आधार पर वोट मांगने वाली राजनीति।
भाजपा नेता ने दावा किया कि वर्ष 2027 से लेकर 2047 तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा, दलित और ब्राह्मण समाज भाजपा के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सभी वर्गों के विकास और सम्मान के लिए समान रूप से कार्य किया है, जबकि समाजवादी पार्टी केवल चुनावी समय में अलग-अलग समुदायों को साधने की कोशिश करती है।
वहीं, अखिलेश यादव ने अपने सम्मेलन में भाजपा सरकार पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने बिकरू कांड, माफिया विकास दुबे एनकाउंटर और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को जनेश्वर मिश्र पार्क में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण सम्मेलन सपा कार्यालय में करना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की राजनीतिक मानसिकता से जोड़ते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए सभी दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी जहां पीडीए के जरिए पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और अब ब्राह्मण समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं भाजपा इसे केवल चुनावी रणनीति और भ्रम फैलाने वाला अभियान बता रही है।
फिलहाल पीडीए को लेकर छिड़ी यह बहस उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई गर्माहट ले आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों प्रमुख दल सामाजिक समीकरणों के जरिए आगामी चुनावी मुकाबले को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
TagsPDAmeaningBJPtauntKeshavAkhileshsurroundमायनेबीजेपीतंजकेशवअखिलेशघेराजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





