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उत्तर प्रदेश
यूपी चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी BJP-RSS, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने से ज्यादा चुनाव पर जोर
jantaserishta.com
9 Oct 2026 3:10 PM IST

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- उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी और आरएसएस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
- सुल्तानपुर की बैठक में कार्यकर्ताओं ने सरकारी संस्थाओं में जगह न मिलने और स्थानीय निकायों में नियुक्तियों में देरी को लेकर नाराजगी जताई।
- चुनाव से पहले प्रदेश में करीब 80 हजार सर्व समाज बैठकें करने और 42 से 43 बिरादरियों तक पहुंचने की योजना है।
- गांवों से लेकर बूथ स्तर तक संपर्क बढ़ाने और संगठन के कामकाज पर नजर रखने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए जाएंगे।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है। दोनों संगठनों का जोर लोगों के बीच पहुंच बढ़ाने, अलग-अलग बिरादरियों से जुड़ने और बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर है। इसी सिलसिले में संघ, बीजेपी और उनसे जुड़े संगठनों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं।
इन बैठकों में चुनावी योजना के साथ संगठन के अंदर चल रही नाराजगी पर भी बात हुई। हालांकि, फिलहाल नेताओं और कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता चुनाव की तैयारी को बताया जा रहा है।
सुल्तानपुर की बैठक में उठी कार्यकर्ताओं की शिकायतें
हाल ही में सुल्तानपुर में हुई समन्वय बैठक में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की परेशानियां सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक, कई कार्यकर्ताओं का कहना था कि सरकारी आयोगों, निकायों और दूसरी संस्थाओं में उन्हें उम्मीद के मुताबिक जिम्मेदारी या जगह नहीं मिल पाई। इससे कुछ लोगों में उपेक्षा की भावना बनी हुई है।
नगर पालिका जैसे स्थानीय निकायों में नामांकन के जरिए होने वाली नियुक्तियों में देरी का मुद्दा भी उठा। कार्यकर्ताओं ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की। बैठक में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि अभी चुनाव की तैयारी सबसे जरूरी है। संगठन के भीतर के मतभेदों और शिकायतों को दूर करने पर चुनाव के बाद ध्यान दिया जा सकता है।
करीब 80 हजार बैठकों के जरिए लोगों तक पहुंचने की योजना
बीजेपी और संघ ने चुनाव से पहले समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ बातचीत बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके लिए पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 80 हजार सर्व समाज बैठकें आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में लगभग 42 से 43 बिरादरियों की पहचान की गई है। संघ और बीजेपी के कार्यकर्ता इन समुदायों के बीच जाकर उनसे संपर्क करेंगे। पार्टी की ओर से शक्ति केंद्र के स्तर पर भी बैठकें होंगी। शक्ति केंद्र तीन से पांच बूथों को मिलाकर बनाया गया समूह होता है।
शहरों में होने वाली ऐसी बैठकों को ‘ड्राइंग रूम बैठक’ नाम दिया गया है। इसके साथ ही गांव से बूथ तक संगठन को सक्रिय करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। अगले चार महीनों में वैचारिक संगठनों को जमीन पर ज्यादा सक्रिय करने की तैयारी है।
गांवों में जाकर लोगों से सीधी बातचीत करेंगे कार्यकर्ता
लोगों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के लिए जन-स्पर्श अभियान चलाने की योजना है। इसके तहत कार्यकर्ता गांवों में जाकर आम लोगों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और कमजोर वर्गों से बातचीत करेंगे। पुराने समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की शिकायतें भी सुनी जाएंगी, ताकि नाराजगी की वजह समझकर उसका हल निकाला जा सके।
इसके अलावा जन-जागरण अभियान के जरिए योगी सरकार के विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासन से जुड़े कामों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है। संगठन-संवाद अभियान के तहत कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और विधायकों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसका मकसद सरकार और संगठन के बीच बातचीत की कमी को दूर करना भी है।
बूथ स्तर पर कामकाज की निगरानी का भी इंतजाम
ग्रामीण इलाकों में समर्थन बढ़ाने के लिए ग्राम-स्पर्श अभियान पर भी जोर दिया जा रहा है। योजना है कि गांवों से लेकर बूथ और शक्ति केंद्र तक पार्टी का नेटवर्क मजबूत किया जाए और कार्यकर्ता लगातार लोगों के संपर्क में रहें।
अभियान के कामकाज पर नजर रखने के लिए निगरानी की व्यवस्था भी बनाई गई है। जमीनी गतिविधियों की जानकारी तीन स्तर पर बनाए गए व्हाट्सऐप समूहों और पार्टी के ‘सरल’ ऐप के जरिए जुटाने की योजना है। पहले जिला स्तर पर इसकी समीक्षा होगी और फिर लखनऊ स्थित वार रूम से निगरानी की जाएगी।
आने वाले विधानसभा चुनाव में इन योजनाओं को जमीन पर उतारना दोनों संगठनों के लिए अहम माना जा रहा है।
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