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उत्तर प्रदेश
अखिलेश यादव के लैपटॉप वितरण पर BJP MLC का तंज, बोले- 'वोट देगा अहीर और लैपटॉप लेगा जहीर'
Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 10:38 PM IST

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उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देकर सम्मानित किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश ने इस कार्यक्रम को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लैपटॉप वितरण की तस्वीरें साझा करते हुए एक टिप्पणी की, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया।
सुभाष यदुवंश ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'वोट देगा अहीर और लैपटॉप लेगा जहीर।' उनकी इस टिप्पणी को सपा की राजनीति और लैपटॉप वितरण कार्यक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा नेता ने इस मौके पर समाजवादी पार्टी पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप भी लगाया।
अखिलेश यादव ने हाल ही में लखनऊ...
अखिलेश यादव ने हाल ही में लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय में मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देकर सम्मानित किया था। कार्यक्रम की तस्वीरों में अखिलेश विद्यार्थियों को लैपटॉप देते नजर आ रहे हैं। इनमें मुस्लिम छात्र भी दिखाई दे रहे हैं।
इन्हीं तस्वीरों को साझा करते हुए सुभाष यदुवंश ने सपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी यादव समुदाय को अपने प्रमुख वोट बैंक के रूप में देखती है, लेकिन पार्टी की योजनाओं और प्राथमिकताओं में दूसरे समुदायों को अधिक महत्व दिया जाता है।
हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी योजना का लाभ किसी खास समुदाय को प्राथमिकता देकर दिया गया। लैपटॉप वितरण में विद्यार्थियों के चयन के नियम और पात्रता संबंधी जानकारी इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति के....
सुभाष यदुवंश इससे पहले भी समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति के फॉर्मूले पर सवाल उठा चुके हैं। भाजपा नेता का आरोप है कि सपा इस नारे के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों का समर्थन हासिल करने की कोशिश करती है, जबकि पार्टी के फैसलों में परिवार का प्रभाव प्रमुख रहता है।
समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति में पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व की बात करती रही है। ऐसे में PDA की राजनीति को लेकर भाजपा और सपा के बीच पहले भी कई बार बयानबाजी हो चुकी है।
ताजा विवाद में भी भाजपा नेता ने लैपटॉप वितरण कार्यक्रम को सपा की राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के कार्यक्रम को लेकर उठे आरोपों का आकलन करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया गया।
लैपटॉप योजना को लेकर पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों दल
लैपटॉप वितरण का मुद्दा समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई लैपटॉप योजना को सपा अपनी प्रमुख पहलों में गिनाती रही है। पार्टी का तर्क रहा है कि तकनीक तक विद्यार्थियों की पहुंच बढ़ाने से उनकी पढ़ाई में मदद मिल सकती है।
वहीं, भाजपा नेताओं ने पहले इस योजना की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक लाभ से जोड़कर देखा था। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी योजना को लेकर सवाल उठाए थे और इसे 'लॉलीपॉप योजना' कहा था। भाजपा की ओर से योजना के क्रियान्वयन और उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर भी आरोप लगाए गए थे।
इन आरोपों के बावजूद, किसी योजना में अनियमितता या भेदभाव की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड और ठोस सबूत जरूरी होते हैं। राजनीतिक बयान अपने आप में ऐसे आरोपों को साबित नहीं करते।
मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देने का कार्यक्रम अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। भाजपा एमएलसी ने इसे सपा की सामाजिक और चुनावी रणनीति से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं, इस विवाद में मुख्य सवाल यह है कि विद्यार्थियों को लैपटॉप देने के लिए क्या मानदंड अपनाए गए और क्या सभी पात्र छात्रों को समान अवसर मिला।
फिलहाल सुभाष यदुवंश की टिप्पणी ने सपा और भाजपा के बीच PDA राजनीति तथा छात्र कल्याण योजनाओं को लेकर बहस को फिर हवा दे दी है। इस मामले में लैपटॉप पाने वाले विद्यार्थियों की पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़ी स्पष्ट जानकारी सामने आने पर विवाद के तथ्यों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
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