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यूपी MLC चुनाव के लिए भाजपा ने छह और प्रत्याशी घोषित किए, 11 सीटों पर तस्वीर साफ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को छह और प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। इसके साथ ही भाजपा ने सभी 11 सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं। समाजवादी पार्टी ने इससे एक दिन पहले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। दोनों प्रमुख दलों के उम्मीदवार सामने आने के बाद अब विधान परिषद चुनाव की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
भाजपा की ताजा सूची में तीन स्नातक और तीन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदारनाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा से इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को मैदान में उतारा गया है।
BJP releases a list of candidates for MLC elections in Bihar and Uttar Pradesh. pic.twitter.com/tUolvdcwlf
— ANI (@ANI) September 29, 2026
भाजपा ने इससे पहले पांच सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। मंगलवार को बाकी छह नाम जारी होने के साथ पार्टी ने शिक्षक और स्नातक कोटे की सभी 11 सीटों पर अपनी सूची पूरी कर ली। इन 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
समाजवादी पार्टी भी विधान परिषद चुनाव को लेकर पहले ही अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। पार्टी ने विभिन्न शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशी घोषित कर मुकाबले को सीधे राजनीतिक रंग दे दिया है। मेरठ शिक्षक क्षेत्र से डॉ. नितिन तोमर और मुरादाबाद-बरेली क्षेत्र से दानिश अख्तर समेत अन्य उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है।
Biennial elections for 10 Rajya Sabha seats from Uttar Pradesh and 1 seat from Uttarakhand have been announced, as their term of office expires on 25th November. pic.twitter.com/GVHuWN98Vg
— ANI (@ANI) September 29, 2026
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया मंगलवार, 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है। निर्वाचन अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।
मतदान 23 अक्टूबर को कराया जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को मतगणना होने की जानकारी है। निर्वाचन प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक पूरी की जानी है। वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने वाला है, इसलिए निर्वाचन आयोग ने इससे पहले चुनाव कराने का कार्यक्रम तय किया है।
विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित पात्रता रखने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पात्र शिक्षकों के लिए अलग मतदाता सूची होती है। इसी कारण इन चुनावों में सामान्य विधानसभा चुनाव की तुलना में मतदाताओं की संख्या सीमित होती है और व्यक्तिगत संपर्क तथा संगठनात्मक नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भाजपा ने कुछ मौजूदा विधान परिषद सदस्यों पर फिर भरोसा जताया है। पार्टी की ताजा सूची में ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जो पहले से विधान परिषद में सक्रिय रहे हैं। इसके साथ कुछ क्षेत्रों में संगठन से जुड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी की कोशिश अपने मौजूदा आधार को बनाए रखने के साथ शिक्षक और स्नातक वर्ग के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की है।
समाजवादी पार्टी भी इस चुनाव को गंभीरता से लड़ रही है। पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के जरिए शिक्षक, कर्मचारी और शिक्षित मतदाता वर्ग के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इसके चलते कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा और सपा उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ सीटों पर निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों की मौजूदगी भी परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
इन चुनावों में स्थानीय शिक्षक संगठन, स्नातक मतदाता समूह और व्यक्तिगत संपर्क विशेष महत्व रखते हैं। कई सीटों पर ऐसे उम्मीदवार भी मजबूत माने जाते रहे हैं जिनकी राजनीतिक दलों से अलग अपनी संगठनात्मक पकड़ होती है। इसलिए केवल पार्टी के चुनाव चिह्न या राजनीतिक माहौल के आधार पर परिणाम तय होना जरूरी नहीं होता।
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब उम्मीदवार अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान तेज करेंगे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश होगी, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क अभियान चलाया जाएगा।
भाजपा के लिए यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारी की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। पार्टी शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपने नेटवर्क की ताकत का आकलन कर सकेगी। समाजवादी पार्टी भी इन चुनावों के जरिए अपने संगठन और समर्थक आधार को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का अपना अलग राजनीतिक महत्व रहा है। इन सीटों पर कई बार बड़े राजनीतिक दलों के साथ शिक्षक संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि इस चुनाव में प्रत्याशी चयन के दौरान दलों ने क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ पर विशेष ध्यान दिया है।
अब 6 अक्टूबर तक नामांकन का दौर चलेगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने पर उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी। तभी यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि किस सीट पर कितने प्रत्याशी मैदान में हैं।
भाजपा और समाजवादी पार्टी की सूची सामने आने के बाद चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में शिक्षक और स्नातक मतदाता फैसला करेंगे कि विधान परिषद की इन 11 सीटों पर किसे प्रतिनिधित्व





