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उत्तर प्रदेश
बिकरू कांड: विकास दुबे के करीबी दयाशंकर को कोर्ट से बड़ी राहत, मुठभेड़ केस में दोषमुक्त
nidhi
28 July 2026 7:03 AM IST

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विकास दुबे के सहयोगी दयाशंकर दोषमुक्त, कोर्ट ने पुलिस की मुठभेड़ कहानी पर उठाए सवाल
कानपुर : उत्तर प्रदेश के चर्चित बिकरू कांड से जुड़े एक मामले में कानपुर की अदालत ने गैंगस्टर विकास दुबे के करीबी सहयोगी दयाशंकर को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर मुठभेड़ से जुड़ी अपनी कहानी को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इस फैसले के बाद एक बार फिर बिकरू कांड से जुड़े मामलों की जांच और पुलिस कार्रवाई चर्चा में आ गई है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस, गवाहों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के साथ सिद्ध नहीं कर सका। इसी आधार पर दयाशंकर को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
दयाशंकर का नाम विकास दुबे गैंग के सक्रिय सदस्यों में लिया जाता रहा है। बिकरू कांड के बाद दर्ज विभिन्न मामलों में उसके खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। इस मामले में पुलिस का दावा था कि मुठभेड़ के दौरान हुई घटनाएं अभियोजन के आरोपों की पुष्टि करती हैं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना।
गौरतलब है कि जुलाई 2020 में कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस टीम पर हुए हमले में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाकर विकास दुबे गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की थी। विकास दुबे भी बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था, जबकि उसके कई सहयोगियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के लिए अभियोजन को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं। यदि अदालत को साक्ष्यों में संदेह या कमी दिखाई देती है, तो आरोपी को संदेह का लाभ दिया जा सकता है। इसी सिद्धांत के आधार पर अदालत ने दयाशंकर को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।
हालांकि, यह फैसला केवल संबंधित मामले तक सीमित है। यदि दयाशंकर के खिलाफ अन्य मामले लंबित हैं, तो उनकी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। अदालत के इस निर्णय के बाद मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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