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दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बहू नहीं बेटा सुब्रत निकला साजिशकर्ता

कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है। जिस मामले में अब तक बहू शालू को हत्या की कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा था, उसमें पुलिस की जांच अब बेटे सुब्रत की ओर मुड़ गई है। पुराने नौकर के बयान बदलने और आरोपियों का आमना-सामना कराने के बाद पुलिस ने सुब्रत को साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार किया है। इस घटनाक्रम के बाद शुरुआती जांच और बहू शालू को आरोपी मानने के आधार को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में हत्या का आरोप जिस पुराने नौकर पर है, उसने बुधवार को अपने पहले दिए बयान से पलटते हुए नया बयान दिया। उसने शालू की जगह विनीत मिनोचा के बेटे सुब्रत का नाम लिया। नौकर के इस बयान के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों से दोबारा पूछताछ की और आरोपियों का आमना-सामना कराया।
पुलिस की जांच में नया मोड़ उस समय आया जब पुराने नौकर ने कथित साजिश में सुब्रत की भूमिका बताई। इसके बाद सुब्रत से पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक आमना-सामना कराए जाने के बाद सुब्रत ने भी साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की। इसके आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
नौकर के बयान बदलने के बाद इस हत्याकांड की शुरुआती जांच पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले किन साक्ष्यों और किस बयान के आधार पर पुलिस बहू शालू को कथित मास्टरमाइंड मान रही थी। यदि पुराने नौकर का शुरुआती बयान इसका प्रमुख आधार था तो उसके अब बयान बदलने के बाद पहले की जांच के दूसरे साक्ष्यों की भी समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस के सामने अब नौकर के दोनों बयानों की सत्यता जांचने की चुनौती है। पहले उसने शालू का नाम लिया था और बाद में उसी बयान से पलटकर सुब्रत को साजिशकर्ता बताया। ऐसे में केवल बयान ही नहीं बल्कि परिस्थितिजन्य, तकनीकी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से उसकी बात की पुष्टि करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने मामले की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई थी। पुराने नौकर की भूमिका सामने आने के बाद उससे पूछताछ की गई। शुरुआती बयान के आधार पर जांच बहू शालू की ओर बढ़ी थी, लेकिन अब उसी व्यक्ति के बदले हुए बयान ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है।
जांच में सुब्रत का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उससे सवाल-जवाब किए। पुराने नौकर और सुब्रत का आमना-सामना भी कराया गया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद सुब्रत ने साजिश से जुड़ी बात स्वीकार की। हालांकि किसी भी आरोपी के खिलाफ अपराध का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
इस पूरे घटनाक्रम में शालू की भूमिका को लेकर भी स्थिति बदल गई है। जिस महिला को पहले कथित तौर पर हत्या की साजिश का मुख्य किरदार माना जा रहा था, उसके खिलाफ शुरुआती आरोपों का आधार अब जांच के घेरे में है। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि शालू के खिलाफ नौकर के पहले बयान के अतिरिक्त कौन-कौन से स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद थे।
अगर पहले की कार्रवाई मुख्य रूप से एक आरोपी या संदिग्ध के बयान पर आधारित थी तो उस बयान के बदलने के बाद जांच के बाकी पहलुओं की दोबारा पड़ताल आवश्यक हो जाती है। हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोप तय करने के लिए बयान के साथ अन्य साक्ष्यों का मेल होना भी अहम होता है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुराने नौकर ने अपना बयान क्यों बदला। क्या उसने पहला बयान किसी दबाव में दिया था, क्या उसने पुलिस को गलत जानकारी दी थी या नए साक्ष्यों के सामने आने के बाद उसने दूसरा बयान दिया, इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
सुब्रत की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके और पुराने नौकर के बीच कथित संपर्क तथा हत्या की साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर सकती है। हत्या से पहले और बाद की गतिविधियों से जुड़े उपलब्ध साक्ष्य भी पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
विनीत मिनोचा हत्याकांड में आए इस बदलाव ने पुलिस जांच की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल पैदा किए हैं। पहले बहू को कथित मास्टरमाइंड बताना और बाद में बेटे को साजिशकर्ता मानकर गिरफ्तार करना जांच के दो अलग-अलग चरणों को सामने लाता है।
पुलिस को अब यह स्पष्ट करना होगा कि पहले शालू के खिलाफ क्या ठोस आधार थे और बाद में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया जिससे जांच सुब्रत तक पहुंची। पुराने नौकर के बयान के अलावा यदि कोई अन्य साक्ष्य मौजूद हैं तो उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
आपराधिक मामलों में किसी आरोपी का बयान जांच का एक हिस्सा होता है, लेकिन पूरे मामले को साबित करने के लिए अन्य साक्ष्यों की भी आवश्यकता होती है। यही कारण है कि नौकर के बयान में आए बदलाव के बाद अब मामले से जुड़े प्रत्येक तथ्य की दोबारा जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस के मुताबिक पुराने नौकर के नए बयान और आमना-सामना कराए जाने के बाद सुब्रत की कथित भूमिका सामने आई है।
दूसरी ओर, बहू शालू को पहले गुनाहगार मानने के आधार को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जांच के अगले चरण में मिलना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना है कि नौकर के पुराने और नए बयान में से किसे अन्य साक्ष्यों से समर्थन मिलता है।
विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया खुलासा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच की दिशा ही बदल गई है। पहले जिस बहू शालू को कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा था, अब पुराने नौकर ने उसके बजाय बेटे सुब्रत का नाम लिया है। इसके बाद सुब्रत की गिरफ्तारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
अब पुलिस के सामने हत्या की पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ने के साथ यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी भी है कि शुरुआती जांच में शालू तक पहुंचने का आधार क्या था। पुराने नौकर के बदले बयान, सुब्रत की कथित भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही हत्याकांड की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।





