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उत्तर प्रदेश
यूपी में आपदा पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत, मुआवजा हुआ दोगुना
Rajeshwari Nishad
6 Nov 2026 12:54 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दीपावली से पहले प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों और किसानों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने आपदा राहत सहायता राशि में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करते हुए प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता चार लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा से फसलों को होने वाले नुकसान पर किसानों को मिलने वाली सहायता राशि में भी 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, राहत राशि में बढ़ोतरी का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को अधिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। उत्तर प्रदेश में हर साल बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका और पुनर्वास की गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई आर्थिक सहायता से पीड़ित परिवारों को मुश्किल परिस्थितियों से उबरने में मदद मिलेगी।
इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संशोधित राहत मानकों का लाभ एक अप्रैल 2026 से चार नवंबर 2026 तक हुए पात्र नुकसान के मामलों में भी दिया जाएगा। यानी निर्धारित अवधि के दौरान प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए परिवार और किसान नए मानकों के अनुसार सहायता प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए संबंधित नुकसान का पात्रता मानकों के अंतर्गत आना आवश्यक होगा।प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पहले उसके आश्रितों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। अब इस राशि को दोगुना करके आठ लाख रुपये कर दिया गया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके कमाने वाले सदस्य की आपदा के कारण मृत्यु हो जाती है। आर्थिक सहायता किसी परिवार की क्षति की भरपाई तो नहीं कर सकती, लेकिन दैनिक जरूरतों और भविष्य की जिम्मेदारियों को पूरा करने में सहारा जरूर बन सकती है।
योगी सरकार ने किसानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सिंचित क्षेत्रों में फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता राशि 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं, असिंचित यानी वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। इससे उन किसानों को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिल सकेगी, जिनकी फसलें भारी बारिश, बाढ़ या अन्य अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हुई हैं।बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी से जुड़े किसानों को भी राहत देने का निर्णय लिया गया है। ऐसे मामलों में सहायता राशि 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। खेतों में गाद जमा होने से होने वाले नुकसान के लिए सहायता राशि 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 23 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। इसी तरह भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण कृषि भूमि को हुए नुकसान के लिए सहायता राशि 47 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है।
सरकार के इस निर्णय का फायदा सिर्फ फसल उगाने वाले किसानों को ही नहीं, बल्कि पशुपालकों को भी मिलेगा। प्राकृतिक आपदा में बड़े दुधारू पशुओं की मृत्यु होने पर दी जाने वाली सहायता राशि 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मृत्यु पर मिलने वाली राशि चार हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये की गई है।इसके अलावा घोड़े और खच्चर जैसे भारवाहक पशुओं के नुकसान पर सहायता राशि 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 25,400 रुपये निर्धारित की गई है। मुर्गीपालन करने वाले किसानों को भी राहत मिलेगी। आपदा में मुर्गियों की मृत्यु होने पर सहायता राशि 100 रुपये से बढ़ाकर 130 रुपये प्रति पक्षी कर दी गई है। यह बदलाव पशुपालन को आजीविका का मुख्य साधन बनाने वाले ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्राकृतिक आपदा के कारण मकानों को होने वाले नुकसान पर भी आर्थिक सहायता बढ़ाई गई है। नए मानकों के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1.85 लाख रुपये और पर्वतीय क्षेत्रों में 2.06 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है। मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 93 हजार रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। इससे प्रभावित परिवारों को अपने घरों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में मदद मिल सकेगी।सरकार ने सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत के लिए भी सहायता के मानक निर्धारित किए हैं। आपदा से क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए 15.50 लाख रुपये तक तथा माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 26 लाख रुपये तक का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही सड़कों और अस्पतालों की मरम्मत के लिए भी संशोधित मानक लागू किए गए हैं।
आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविरों में सहायता की अवधि भी महत्वपूर्ण है। संशोधित व्यवस्था के तहत प्रभावित परिवारों को अधिकतम 30 दिनों तक राहत शिविर संबंधी सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। सूखे की स्थिति में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 90 दिनों तक सहायता दी जा सकेगी। इससे उन इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां आपदा के बाद सामान्य जनजीवन बहाल होने में अधिक समय लगता है।उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और यहां बड़ी आबादी की आजीविका खेती तथा पशुपालन पर निर्भर है। मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों को कई बार एक ही सीजन में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। फसल खराब होने के बाद किसानों के सामने अगली बुवाई, खाद, बीज और सिंचाई की व्यवस्था करने की चुनौती होती है। ऐसे में मुआवजा राशि में बढ़ोतरी से उन्हें अगली फसल की तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बढ़ी हुई राहत राशि का वास्तविक लाभ प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचना भी जरूरी होगा। इसके लिए नुकसान का सही आकलन, पात्र परिवारों की पहचान और सहायता राशि का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरण महत्वपूर्ण रहेगा। किसानों को भी अपने क्षेत्र में लागू राहत मानकों तथा आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित तहसील और राजस्व अधिकारियों से प्राप्त करनी चाहिए।दीपावली से पहले लिया गया योगी सरकार का यह फैसला आपदा प्रभावित परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से मृत्यु पर सहायता राशि दोगुनी करने और फसल नुकसान के लिए मुआवजा बढ़ाने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहारा मिलने की उम्मीद है। अब इस निर्णय का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र लाभार्थियों को संशोधित सहायता कितनी जल्दी उपलब्ध कराई जाती है।
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