उत्तर प्रदेश

राहुल गांधी को बड़ी राहत, 8 साल पुराने मानहानि केस में बरी

Kavita2
26 Oct 2026 1:54 PM IST
राहुल गांधी को बड़ी राहत, 8 साल पुराने मानहानि केस में बरी
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सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि मामले में राहत मिलने की खबर सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत ने वर्ष 2018 में दर्ज उस मामले को खारिज करने का आदेश दिया है, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबंध में राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा था। सोमवार को मामले की सुनवाई से पहले राहुल गांधी दिल्ली से सुल्तानपुर पहुंचे और अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। यह मामला करीब आठ वर्षों से कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है।

सोमवार को अदालत पहुंचे राहुल गांधी

राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने विशेष एमपी-एमएलए अदालत की सुनवाई में हिस्सा लिया।

मामला वर्ष 2018 में की गई एक कथित टिप्पणी से संबंधित था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के संबंध में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

इस टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया गया था।

प्राप्त विवरण के मुताबिक, अदालत ने मामले को खारिज करने का आदेश दिया है। हालांकि आदेश की प्रमाणित प्रति और उसके विस्तृत कानूनी आधार की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

2018 में शुरू हुआ था विवाद

इस मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे थे।

राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेतृत्व को लेकर टिप्पणी की थी।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संबंध में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

इसी कथित टिप्पणी को आधार बनाकर आपराधिक मानहानि की शिकायत की गई।

हालांकि राहुल गांधी के मूल बयान के सटीक शब्दों और उनके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि इस विवरण से नहीं होती।

अमित शाह से जुड़ी टिप्पणी बनी थी विवाद की वजह

वर्ष 2018 में अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वर्तमान में वह केंद्रीय गृह मंत्री हैं।

चुनावी प्रचार के दौरान राहुल गांधी द्वारा भाजपा नेतृत्व की आलोचना को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।

शिकायत में कहा गया था कि संबंधित टिप्पणी मानहानिकारक थी। वहीं राजनीतिक भाषणों और चुनावी आलोचना को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच कानूनी प्रश्न भी उठते हैं।

किसी राजनीतिक बयान से आपराधिक मानहानि हुई है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत करती है।

भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी शिकायत

इस मामले में सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा शिकायतकर्ता थे। वह जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से भाजपा नेतृत्व की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंची।

मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कार्यवाही हुई। इन धाराओं में आपराधिक मानहानि की परिभाषा और सजा का प्रावधान था।

अदालत ने राहुल गांधी को किया दोषमुक्त

26 अक्टूबर 2026 को विशेष एमपी-एमएलए अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने फैसला सुनाया।

अदालत ने राहुल गांधी को दोषमुक्त करते हुए माना कि संबंधित टिप्पणी मानहानिकारक प्रकृति की नहीं थी।

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह भी पाया कि शिकायत दर्ज कराने वाले भाजपा नेता संबंधित टिप्पणी से सीधे प्रभावित व्यक्ति की कानूनी स्थिति में नहीं थे।

इस आधार पर अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज कर दी।

सोहराबुद्दीन मामले के संदर्भ में हुई थी टिप्पणी

वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने जिस टिप्पणी का इस्तेमाल किया था, उसका संबंध सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले से था।

उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को हत्या के एक मामले में आरोपी बताए जाने का उल्लेख किया था।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अमित शाह को दिसंबर 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने उस मामले से आरोपमुक्त कर दिया था।

शिकायतकर्ता का कहना था कि इसके बावजूद राहुल गांधी की टिप्पणी मानहानिकारक थी। वहीं राहुल गांधी ने सुनवाई के दौरान आरोपों का विरोध करते हुए कहा था कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया।

पहले जमानत पर हुए थे रिहा

मानहानि की शिकायत पर सुनवाई कई वर्षों तक चली। अदालत ने नवंबर 2023 में राहुल गांधी को समन जारी किया था।

इसके बाद फरवरी 2024 में राहुल गांधी अदालत में उपस्थित हुए और उन्हें जमानत मिली।

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी की आवाज के नमूने की तुलना करने की मांग भी उठाई गई थी।

निचली अदालत ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दायर याचिकाओं को भी राहत नहीं मिली।

बाद में अदालत ने फैसले के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की थी, जिसे बदलकर 26 अक्टूबर कर दिया गया।

फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी

राहुल गांधी को दोषमुक्त किए जाने के बाद अदालत परिसर के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई।

कार्यकर्ताओं ने ढोल बजाए और मिठाइयां बांटीं। सुनवाई को देखते हुए अदालत परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी।

फैसला सुनाए जाने के समय राहुल गांधी अदालत में मौजूद थे। निर्णय आने के बाद वह अदालत परिसर से रवाना हो गए।

आठ साल पुराने मामले का हुआ निपटारा

वर्ष 2018 में शुरू हुआ यह विवाद अक्टूबर 2026 तक अदालत में विचाराधीन रहा।

इस दौरान देश की राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।

अदालत के ताजा फैसले से उन्हें इस विशेष आपराधिक मानहानि मामले में राहत मिली है।

हालांकि शिकायतकर्ता के पास उपलब्ध कानूनी विकल्प और किसी संभावित अपील की स्थिति अलग विषय है। फिलहाल किसी अपील के दाखिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।

सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत का फैसला राहुल गांधी के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। अदालत ने संबंधित टिप्पणी को आपराधिक मानहानि की श्रेणी में नहीं माना और उन्हें मामले में दोषमुक्त कर दिया।

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