उत्तर प्रदेश

लोगों के लिए बड़ी खबर EWS प्रमाण पत्र समेत कई सेवाएं होंगी आसान

Ratna Netam
12 Sept 2026 6:39 PM IST
लोगों के लिए बड़ी खबर EWS प्रमाण पत्र समेत कई सेवाएं होंगी आसान
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन और राजस्व से जुड़े काम कराने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब EWS प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर जमीन के बंटवारे, खतौनी और दूसरे राजस्व मामलों की प्रक्रिया को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने तीन नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की है। इनमें **धारा 116 पोर्टल, EWS पोर्टल और सरलीकृत खतौनी** शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के जरिए आवेदन से लेकर निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें अब तक तहसील और राजस्व कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। सरकार का लक्ष्य है कि नामांतरण यानी दाखिल-खारिज, पैमाइश, भूमि बंटवारा और दूसरे राजस्व मामलों को तय समय में निपटाया जाए।
EWS प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS से जुड़े लोगों के लिए सबसे बड़ा बदलाव नया EWS पोर्टल है।
अब पात्र व्यक्ति EWS प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद लेखपाल और तहसीलदार की रिपोर्ट भी डिजिटल तरीके से आगे बढ़ेगी।
इससे आवेदन किस अधिकारी के पास लंबित है, किस स्तर पर जांच चल रही है और उसका निस्तारण कब होना है, इन सभी चीजों को ट्रैक करना आसान होगा।
पहले कई मामलों में आवेदकों को रिपोर्ट लगवाने या आवेदन की स्थिति जानने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था इस भागदौड़ को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
आवेदन की स्थिति भी देख सकेंगे
नई डिजिटल व्यवस्था का एक बड़ा फायदा ट्रैकिंग सिस्टम है।
राजस्व परिषद ने आवेदन दाखिल होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड में रखने की व्यवस्था की है।
इससे अधिकारी के स्तर पर देरी होने पर यह भी पता चल सकेगा कि मामला कहां अटका हुआ है।
सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और आवेदकों को बार-बार कार्यालय जाकर जानकारी लेने की जरूरत कम होगी।
जमीन बंटवारे के लिए धारा 116 पोर्टल
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार अपनी संयुक्त भूमि के बंटवारे के लिए वाद दाखिल कर सकते हैं।
अब इसी प्रक्रिया के लिए अलग डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया है।
इसका मतलब है कि संयुक्त जमीन का विभाजन चाहने वाले व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से होगी। लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे जमीन बंटवारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।
GIS तकनीक से जमीन की स्थिति देखना आसान
धारा 116 पोर्टल में GIS यानी Geographic Information System तकनीक को भी शामिल किया गया है।
इसकी मदद से भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति को डिजिटल रूप से देखने में मदद मिलेगी।
जमीन के बंटवारे के मामलों में नक्शा, खतौनी और क्षेत्रफल महत्वपूर्ण होते हैं। GIS तकनीक इन रिकॉर्ड्स के साथ जमीन की लोकेशन समझने में अतिरिक्त सुविधा दे सकती है।
इससे गलत सीमांकन और रिकॉर्ड संबंधी विवादों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
खतौनी का नया और सरल रूप
सरकार ने सरलीकृत खतौनी की शुरुआत भी की है।
खतौनी जमीन और उसके खातेदारों से संबंधित महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेज है।
नई व्यवस्था में जमीन का क्षेत्रफल **छह दशमलव स्थानों तक** दिखाया जाएगा। इससे खासतौर पर छोटे भूखंडों के क्षेत्रफल को अधिक सटीकता से दर्ज करने में मदद मिलेगी।
पहले कई मामलों में छोटे अंतर के कारण विवाद पैदा हो जाते थे। ज्यादा सटीक रिकॉर्ड ऐसे मामलों में उपयोगी हो सकता है।
पुराने आदेश भी मिलेंगे व्यवस्थित रूप से
सरलीकृत खतौनी में केवल मौजूदा रिकॉर्ड ही नहीं बल्कि पुराने आदेशों से जुड़ी जानकारी को भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की तैयारी है।
इसमें अभिलेखागार से जुड़े पुराने आदेश और पुराने बंधक आदेश शामिल हो सकते हैं।
इससे किसी जमीन के पुराने स्वामित्व, बंधक या राजस्व आदेशों को समझना आसान होगा।
भूमि खरीदने या पुराने विवादों की जांच करने वाले लोगों के लिए यह जानकारी काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
दाखिल-खारिज पर भी रहेगा फोकस
जमीन खरीदने के बाद नामांतरण यानी दाखिल-खारिज कराना जरूरी प्रक्रिया होती है।
यही प्रक्रिया रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करती है।
सरकार ने राजस्व मामलों को तय समय में निस्तारित करने पर जोर दिया है, जिसमें नामांतरण के मामले भी शामिल हैं।
अगर डिजिटल निगरानी प्रभावी तरीके से लागू होती है तो ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी कम हो सकती है।
पैमाइश के मामलों में भी समयबद्धता
जमीन की सीमाओं को लेकर विवाद होने पर पैमाइश कराई जाती है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ऐसे विवाद बड़ी संख्या में सामने आते हैं।
सरकार ने पैमाइश और दूसरे राजस्व मामलों को भी तय समय में निस्तारित करने की दिशा में डिजिटल निगरानी बढ़ाने की बात कही है।
इससे यह उम्मीद की जा रही है कि आवेदन लंबे समय तक बिना कार्रवाई के लंबित नहीं रहेंगे।
तहसील के चक्कर होंगे कम
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा यही हो सकता है कि लोगों को बार-बार तहसील कार्यालय न जाना पड़े।
EWS प्रमाण पत्र के लिए आवेदन ऑनलाइन होगा।
भूमि बंटवारे का आवेदन भी ऑनलाइन किया जा सकेगा।
रिपोर्ट और प्रगति की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी।
इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत हो सकती है।
अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी
ऑनलाइन ट्रैकिंग का फायदा केवल नागरिकों तक सीमित नहीं है।
सरकार भी यह देख सकेगी कि कौन-सा आवेदन किस स्तर पर लंबित है।
यदि किसी अधिकारी के पास बड़ी संख्या में मामले तय समय से अधिक लंबित हैं तो इसकी निगरानी आसान हो जाएगी।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के अनुसार इन प्रणालियों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, कागजी प्रक्रिया कम करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।
जमीन के विवादों में मदद की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में काफी सामान्य हैं।
सीमा विवाद, हिस्सेदारी, विरासत, नामांतरण और पैमाइश जैसे मामलों के कारण कई बार विवाद अदालत तक पहुंच जाते हैं।
अगर डिजिटल रिकॉर्ड ज्यादा सटीक होंगे और प्रक्रियाएं समय पर पूरी होंगी तो शुरुआती स्तर पर ही कई विवाद कम किए जा सकते हैं।
हालांकि डिजिटल पोर्टल अपने आप विवाद खत्म नहीं करेगा। सही दस्तावेज और निष्पक्ष रिपोर्टिंग अभी भी जरूरी होगी।
EWS वालों को क्या करना होगा?
EWS प्रमाण पत्र बनवाने वाले आवेदक को नया ऑनलाइन पोर्टल इस्तेमाल करना होगा।
आवेदन के दौरान परिवार की आय और संपत्ति से संबंधित जरूरी जानकारी तथा दस्तावेज देने होंगे।
इसके बाद लेखपाल और तहसील स्तर से जांच होगी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऑनलाइन आवेदन शुरू होने का मतलब पात्रता नियमों में बदलाव नहीं है। EWS प्रमाण पत्र तभी जारी होगा जब आवेदक निर्धारित आय और संपत्ति मानकों को पूरा करता हो।
खतौनी क्यों जरूरी है?
ग्रामीण इलाकों में भूमि से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स में खतौनी शामिल है।
इसमें खातेदार का नाम, भूमि का क्षेत्रफल और दूसरे रिकॉर्ड दर्ज होते हैं।
जमीन की खरीद-बिक्री, बैंक लोन, भूमि विवाद और सरकारी योजनाओं में इसकी जरूरत पड़ सकती है।
नई सरलीकृत खतौनी में रिकॉर्ड को अधिक साफ और सटीक रूप में दिखाने का प्रयास किया गया है।
डिजिटल सिस्टम से भ्रष्टाचार पर लग सकती है रोक
राजस्व मामलों में डिजिटल प्रक्रिया बढ़ने का एक उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करना भी है।
जब आवेदन की हर गतिविधि पोर्टल पर दर्ज होगी तो फाइल को अनावश्यक रूप से रोकना मुश्किल हो सकता है।
आवेदक भी अपनी फाइल की स्थिति देख सकेगा।
इससे पारदर्शिता बढ़ सकती है और अनधिकृत बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सिस्टम जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होता है।
समयबद्ध निस्तारण पर खास जोर
नई व्यवस्था में सरकार का प्रमुख जोर समयबद्ध निस्तारण पर है।
यानी केवल ऑनलाइन आवेदन शुरू करना ही लक्ष्य नहीं है।
सरकार चाहती है कि दाखिल-खारिज, पैमाइश, बंटवारे और दूसरे राजस्व मामले तय प्रक्रिया और समयसीमा में पूरे हों।
इससे वर्षों तक चलने वाली फाइलों और लंबित मामलों को कम करने की उम्मीद है।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
अगर नई व्यवस्था सही तरीके से काम करती है तो आम लोगों को कई स्तर पर फायदा हो सकता है।
EWS प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।
जमीन के बंटवारे के लिए धारा 116 का आवेदन डिजिटल होगा।
खतौनी में क्षेत्रफल ज्यादा सटीक दिखाई देगा।
पुराने रिकॉर्ड और आदेश समझना आसान होगा।
आवेदन की स्थिति को ट्रैक किया जा सकेगा।
राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी।
अभी किन बातों का रखें ध्यान?
ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के बावजूद आवेदन करते समय सही दस्तावेज देना जरूरी है।
भूमि संबंधी मामले में खतौनी, नक्शा और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड सही होने चाहिए।
EWS आवेदन में भी आय और संपत्ति की जानकारी सही देनी होगी।
गलत जानकारी मिलने पर आवेदन निरस्त हो सकता है और दूसरे कानूनी परिणाम भी हो सकते हैं।
डिजिटल राजस्व व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं के डिजिटलाइजेशन की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भूमि संबंधी काम अक्सर आम लोगों के लिए सबसे जटिल सरकारी प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं।
यदि आवेदन, रिपोर्ट, नोटिस और निस्तारण एक ही डिजिटल सिस्टम में ट्रैक होने लगते हैं तो प्रक्रिया काफी सरल हो सकती है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सरकार ने तीन प्रमुख सेवाओं को डिजिटल रूप दिया है—**EWS प्रमाण पत्र, धारा 116 के तहत भूमि बंटवारा और सरलीकृत खतौनी।**
इसके साथ नामांतरण, पैमाइश और अन्य राजस्व मामलों को भी तय समय पर निपटाने पर जोर दिया गया है।
अब असली परीक्षा यह होगी कि इन नई व्यवस्थाओं का फायदा जमीन पर आम नागरिकों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
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