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UP मदरसा बोर्ड में बड़ा बदलाव! कामिल-फाजिल डिग्री मान्य नहीं होगी , अब नौकरी दिलाने वाली शिक्षा दी जाएगी

Lucknow. लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मदरसों में दी जाने वाली उच्च शिक्षा की डिग्री कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नातकोत्तर) को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड नया पाठ्यक्रम तैयार करने जा रहा है। मदरसा शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए इसमें व्यावसायिक शिक्षा को जोड़ा जाएगा। इसके लिए सरकार उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड अधिनियम और मदरसा नियमावली में भी संशोधन करने जा रही है। कामिल और फाजिल को बंद करने के साथ ही शिक्षकों की भर्ती की अर्हता भी नए सिरे से निर्धारित की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में कुल 13,329 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 12,35,400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन मदरसों में 9,979 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से आठ) और 3,350 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा नौ से 12) के हैं। इनमें से 561 मदरसे राज्य सरकार द्वारा अनुदानित हैं, जिनमें कुल 2,31,806 छात्र पढ़ते हैं।
अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या 9889 और कर्मचारियों की संख्या 8367 है।कामिल और फाजिल की डिग्री असंवैधानिक घोषित होने के बाद मदरसा शिक्षकों की योग्यता का विषयवार और कक्षावार नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। मदरसों में कार्यरत शिक्षकों को कक्षा एक से पांच या कक्षा छह से आठ में उपयोग में लाने की व्यवस्था की जाएगी। कार्यरत शिक्षकों की विषयवार योग्यता की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। ब्रिज कोर्स चलाकर शिक्षकों को आधुनिक विषयों से भी जोड़ा जाएगा।चूंकि सरकार ने मदरसों में कक्षा एक से आठ तक बेसिक शिक्षा का पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है, इसलिए मदरसा बोर्ड कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम का नए सिरे से निर्धारण करेगा।
सरकार अब मान्यता के मानक और शर्तें शिक्षा विभाग के विद्यालयों के समान करने जा रही है और मदरसों के पाठ्यक्रम तथा शिक्षकों/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति की पात्रता में बदलाव करने जा रही है। इसके लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति गठित होने जा रही है। इसमें बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, वित्त, न्याय और अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के विशेष सचिव सदस्य होंगे। यह समिति मदरसों के सुचारू संचालन, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक बदलावों पर अपनी संस्तुतियां देगी। अध्यक्ष और सदस्यों की पात्रता भी नए सिरे से निर्धारित होगी मदरसा बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा आठ नामित और छह पदेन सदस्य होते हैं। इसके अध्यक्ष और सदस्यों की पात्रता भी नए सिरे से निर्धारित होगी। वर्तमान में अध्यक्ष की योग्यता में मुस्लिम शिक्षाविद् को शामिल किया जाता है, इसे और व्यापक बनाया जाएगा। सदस्यों की पात्रता भी नए सिरे से निर्धारित होगी।





