उत्तर प्रदेश

2027 चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी संग सपा में शामिल

Kavita2
28 Oct 2026 9:38 AM IST
2027 चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप बेटी संग सपा में शामिल
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान को मजबूत करने के लिए लगातार नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार, 27 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप और समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। धर्मेंद्र कश्यप बरेली की आंवला लोकसभा सीट से दो बार भाजपा सांसद रह चुके हैं। उनके सपा में शामिल होने को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि धर्मेंद्र कश्यप के आने से बरेली और पूरे रुहेलखंड क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की ताकत कई गुना बढ़ेगी।

राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने से भाजपा से थे नाराज

धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने के पीछे राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने को एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, वह भाजपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद कर रहे थे।

हालांकि, भाजपा ने बरेली क्षेत्र से प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया। पार्टी की सूची में अपना नाम नहीं होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी सामने आई।

बताया जाता है कि 7 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर डूबते सूरज की तस्वीर साझा करते हुए 'टाटा बाय-बाय' लिखा था। इसके बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें शुरू हो गई थीं। आखिरकार मंगलवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया।

बेटी कीर्ति कश्यप को विधानसभा चुनाव का टिकट

धर्मेंद्र कश्यप के सपा में शामिल होने के साथ ही उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को भी बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी मिली है। अखिलेश यादव ने कीर्ति कश्यप को बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है।

इस घोषणा को सपा की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी का प्रयास बरेली जिले में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच अपना समर्थन बढ़ाना है।

कीर्ति कश्यप को उम्मीदवार बनाए जाने से यह भी स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी धर्मेंद्र कश्यप के राजनीतिक प्रभाव का लाभ आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना चाहती है।

अखिलेश बोले- भाजपा के पतन की शुरुआत

लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र कश्यप का स्वागत करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

अखिलेश यादव ने इसे भाजपा के राजनीतिक पतन की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का परिवार लगातार बड़ा हो रहा है और अलग-अलग वर्गों के नेता पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं।

सपा अध्यक्ष के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप के आने से बरेली और रुहेलखंड में पार्टी के संगठन को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता बदलाव के पक्ष में मतदान करेगी। अखिलेश ने भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को बेहतर विकास और मजबूत कानून-व्यवस्था की जरूरत है।

भाजपा सरकार पर धर्मेंद्र कश्यप का बड़ा हमला

समाजवादी पार्टी की सदस्यता लेने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने भी भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और पिछड़े समाज के लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है।

कश्यप ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि गरीबों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में समान रवैया नहीं अपनाया जाता।

उन्होंने कहा कि वह कश्यप और मछुआरा समाज के लोगों को समाजवादी पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में अगली सरकार अखिलेश यादव के नेतृत्व में बननी चाहिए।

हालांकि, कानून-व्यवस्था और कार्रवाई में भेदभाव को लेकर दिए गए ये बयान धर्मेंद्र कश्यप के राजनीतिक आरोप हैं।

2013 में सपा छोड़ भाजपा में गए थे धर्मेंद्र कश्यप

धर्मेंद्र कश्यप का समाजवादी पार्टी से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। वह पहले भी सपा में सक्रिय थे, लेकिन मई 2013 में पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में आंवला सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।

अब करीब 13 साल बाद उनकी समाजवादी पार्टी में वापसी हुई है। इस राजनीतिक बदलाव को बरेली जिले के चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रुहेलखंड में PDA समीकरण मजबूत करने की तैयारी

समाजवादी पार्टी लंबे समय से पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव इस अभियान के जरिए भाजपा के सामाजिक आधार को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

धर्मेंद्र कश्यप को रुहेलखंड क्षेत्र में कश्यप समाज का प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा माना जाता है। ऐसे में उनके सपा में आने से पार्टी को गैर-यादव पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

विशेष रूप से बरेली, आंवला और आसपास की विधानसभा सीटों पर इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, चुनाव में इस बदलाव का वास्तविक लाभ कितना होगा, यह मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।

बसपा सहित दूसरे दलों के नेताओं ने भी थामा सपा का दामन

लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केवल धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी ही नहीं, बल्कि दूसरे दलों के कई नेता और कार्यकर्ता भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए।

बहुजन समाज पार्टी से जुड़े आबिद अली ने भी अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ग्रहण की।

इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए कई नेताओं ने पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया। सपा नेतृत्व इसे संगठन के विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रहा है।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई सियासी जंग

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज होता जा रहा है।

एक तरफ भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धियों और विकास योजनाओं के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव पीडीए अभियान को विस्तार देकर विपक्षी ताकतों को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं।

धर्मेंद्र कश्यप की सपा में वापसी इस रणनीति का नया उदाहरण है। उनके साथ बेटी कीर्ति कश्यप को विधानसभा प्रत्याशी घोषित करना भी सपा के चुनावी इरादों को दर्शाता है।

अब देखना होगा कि इस राजनीतिक बदलाव से रुहेलखंड में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच चुनावी समीकरण किस हद तक बदलते हैं।

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