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'Bharat Bachao मोर्चा’ की हुंकार, ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली कूच का ऐलान

Bulandshahr बुलंदशहर : अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है। बुलंदशहर के नगर बाईपास स्थित भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय कार्यालय पर किसान संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें किसानों से जुड़े मुद्दों और प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई गई।
भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की जा रही ट्रेड डील को लेकर देश के किसान चिंतित हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों के आयात को लेकर समझौता किया जाता है तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों की आय और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में छोटे और गरीब किसान खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों की बढ़ती आमद से स्थानीय किसानों को अपनी उपज के उचित दाम मिलने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र की मजबूती को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के करीब 80 किसान संगठनों ने मिलकर "भारत बचाओ मोर्चा" का गठन किया है। इस मोर्चे के माध्यम से किसान संगठन प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करेंगे और सरकार तक अपनी मांग पहुंचाएंगे।
किसान नेता ने कहा कि 15 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सभी जनपदों में किसान संगठन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इस ज्ञापन के माध्यम से अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की जाएगी।
ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया और ट्रेड डील को रद्द नहीं किया गया तो 21 जुलाई को सभी किसान संगठन दिल्ली कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने कहा कि वे किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेंगे, जिससे देश के किसानों और कृषि व्यवस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
किसान संगठनों ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं को सामने रखना है। उन्होंने मांग की कि किसी भी विदेशी व्यापार समझौते से पहले किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों से चर्चा की जानी चाहिए।
प्रेस वार्ता में कई किसान संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एकजुट होकर प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। किसान संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा।





