उत्तर प्रदेश

आज़म-अब्दुल्ला केस में बदलेगी पीठ, हाईकोर्ट जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग

Ratna Netam
6 Aug 2026 8:46 PM IST
आज़म-अब्दुल्ला केस में बदलेगी पीठ, हाईकोर्ट जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग
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प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान और उनके बेटे, पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म खान से जुड़े ड्यूल पैन कार्ड मामले में गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने स्वयं को इस प्रकरण की सुनवाई से अलग (रिक्यूज़) कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इस फैसले के बाद अब यह मामला किसी अन्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुना जाएगा।
गौरतलब है कि आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान ने ड्यूल पैन कार्ड मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की हैं। गुरुवार को इन दोनों याचिकाओं को अदालत की कार्यसूची में टॉप-10 मामलों में शामिल किया गया था, जिससे यह संकेत मिल रहा था कि मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। हालांकि, कार्यवाही शुरू होते ही न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया, जिसके बाद मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी तथा अधिवक्ता शाश्वत आनंद और अंकुर आज़ाद ने अदालत के समक्ष आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान का पक्ष रखा था। बचाव पक्ष ने अदालत से अंतरिम जमानत की अर्जी पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए यह भी दलील दी थी कि दोनों को इस मामले में सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए दोनों याचिकाओं को छह अगस्त के लिए टॉप-10 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
गुरुवार सुबह जब अदालत की कार्यवाही प्रारंभ हुई तो आज़म खान की ओर से अधिवक्ताओं ने मामले का उल्लेख कर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। इसी दौरान न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग करने की घोषणा कर दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं को अब नई पीठ गठित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा। हालांकि, उन्होंने अपने इस निर्णय के पीछे कोई कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया।
यह पहली बार नहीं है जब आज़म खान परिवार से जुड़े किसी मामले में न्यायाधीश ने स्वयं को सुनवाई से अलग किया हो। इससे पहले नवंबर 2025 में यतीमखाना प्रकरण से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति समीर जैन ने भी स्वयं को उस मामले से अलग कर लिया था। उस समय भी मामला नई पीठ के समक्ष भेजा गया था। लगातार दूसरी बार किसी न्यायाधीश द्वारा आज़म खान परिवार से जुड़े प्रकरण की सुनवाई से अलग होने के कारण यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
हाल के दिनों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ अन्य मामलों में भी न्यायिक रिक्यूज़ल देखने को मिला है। जुलाई 2026 में कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने भी स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया था। उन्होंने आदेश में उल्लेख किया था कि कुछ पक्षों द्वारा न्यायाधीश तक पहुंच बनाने और सिफारिश कराने के प्रयास किए गए थे, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे न्याय व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है।
ड्यूल पैन कार्ड मामले में अब अगला कदम मुख्य न्यायाधीश द्वारा नई पीठ का गठन करना होगा। नई पीठ तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं पर आगे कब सुनवाई होगी। बचाव पक्ष को उम्मीद है कि नई पीठ जल्द गठित होगी और उनकी अंतरिम जमानत तथा पुनरीक्षण याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई होगी।
फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस घटनाक्रम ने आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान से जुड़े इस बहुचर्चित मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की निगाहें मुख्य न्यायाधीश के अगले प्रशासनिक निर्णय और नई पीठ के गठन पर टिकी हुई हैं, जिसके बाद इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
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