उत्तर प्रदेश

11 एमएलसी सीटों पर भाजपा-सपा में घमासान, योगी-अखिलेश ने झोंकी पूरी ताकत

Kavita2
23 Oct 2026 9:22 AM IST
11 एमएलसी सीटों पर भाजपा-सपा में घमासान, योगी-अखिलेश ने झोंकी पूरी ताकत
x

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भाजपा के चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे हैं, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लगातार पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान हो रहा है और 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

11 सीटों के लिए भाजपा-सपा के बीच प्रतिष्ठा की जंग

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर चुनाव हो रहा है। संख्या के लिहाज से भले ही ये केवल 11 सीटें हों, लेकिन राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है। भाजपा और सपा इसे अपनी ताकत तथा संगठन की मजबूती परखने के अवसर के रूप में देख रही हैं।

पिछले चुनाव में इन 11 सीटों में से समाजवादी पार्टी ने छह और भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं। इस बार भाजपा दो अंकों में सीटें हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है। वहीं समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के साथ भाजपा को कड़ी चुनौती देने में जुटी है।

दोनों दलों के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणाम आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच राजनीतिक रुझान का संकेत दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने खुद संभाली चुनावी कमान

भाजपा ने विधान परिषद चुनाव को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से लेकर आगरा तक कई क्षेत्रों में जनसभाएं कर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है।

मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे हैं। सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक भी अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

भाजपा की रणनीति शिक्षकों, स्नातकों और पार्टी के समर्थक मतदाताओं को एकजुट करने की रही है। चुनावी प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं।

अखिलेश यादव ने भी भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस चुनाव में पूरी ताकत लगाई है। सपा प्रत्याशियों के समर्थन में पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक लगातार चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।

भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज है। अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि नियमों के खिलाफ काम करने वालों को भविष्य में जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।

सपा इस चुनाव में भाजपा सरकार की नीतियों, शिक्षक भर्ती, रोजगार और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रही है। पार्टी का प्रयास है कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की नाराजगी को अपने पक्ष में किया जाए।

72 जिलों में मतदान, 152 उम्मीदवार मैदान में

प्रदेश के 72 जिलों में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान की व्यवस्था की गई है। चुनाव में कुल 152 उम्मीदवार मैदान में हैं और लगभग 14.81 लाख पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।

निर्वाचन व्यवस्था के तहत कुल 2,697 मतदान स्थल बनाए गए हैं। इनमें मतदान प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए 12,309 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट भी निगरानी कर रहे हैं।

मतदान सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है। चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराया जा रहा है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

शिक्षक और स्नातक मतदाता करेंगे उम्मीदवारों का फैसला

विधान परिषद की इन सीटों पर सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी नागरिक मतदान नहीं करते। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता वाले शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं।

पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटें शामिल हैं।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यही कारण है कि प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ विभिन्न शिक्षक संगठनों से जुड़े उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं।

27 अक्टूबर को आएगा चुनावी फैसला

विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान के बाद 27 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। मतगणना पूरी होने के बाद संबंधित सीटों के परिणाम घोषित किए जाएंगे।

भाजपा की कोशिश अधिक से अधिक सीटें जीतकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की है। वहीं समाजवादी पार्टी बेहतर प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि विपक्ष की चुनौती लगातार मजबूत बनी हुई है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, एमएलसी चुनाव के परिणाम सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव का नतीजा तय नहीं करेंगे, क्योंकि दोनों चुनावों के मतदाता और चुनावी परिस्थितियां अलग होती हैं। इसके बावजूद इन परिणामों का राजनीतिक संदेश महत्वपूर्ण हो सकता है।

विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की बड़ी परीक्षा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच लंबे समय से सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ऐसे में विधान परिषद की 11 सीटों का चुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सक्रियता ने चुनाव को और महत्वपूर्ण बना दिया है। दोनों पार्टियों ने संगठनात्मक ताकत, चुनावी रणनीति और अपने प्रमुख नेताओं की लोकप्रियता को दांव पर लगाया है।

अब सबकी नजरें 27 अक्टूबर के परिणामों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने लक्ष्य के अनुरूप बड़ी जीत दर्ज करती है या समाजवादी पार्टी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने में सफल होती है। निश्चित रूप से चुनाव के नतीजे 2027 की राजनीतिक तैयारियों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Next Story