- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- Bareilly : कांवड़ियों...

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली में सावन माह और कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस वर्ष भी कांवड़ियों के स्वागत के लिए प्रमुख शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में पौधे वितरित किए जाएंगे। जिला प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ हरियाली बढ़ाने का संकल्प भी लें।
बरेली प्रशासन ने पिछले वर्ष भी कांवड़ यात्रा के दौरान प्रमुख शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया था। इस पहल को श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार भी प्रशासन ने पुष्पवर्षा की परंपरा को जारी रखने का निर्णय लिया है।
प्रशासन के अनुसार, अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर सहित नाथ नगरी के प्रमुख शिवालयों के ऊपर से हेलीकॉप्टर द्वारा फूलों की वर्षा की जाएगी। कांवड़ मार्गों पर भी निर्धारित स्थानों पर श्रद्धालुओं का फूलों से स्वागत किया जाएगा, जिससे धार्मिक वातावरण और अधिक भव्य बने।
जिला प्रशासन ने बताया कि सावन के दौरान बरेली में बड़ी संख्या में कांवड़िए विभिन्न राज्यों और जिलों से पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुविधा, सुरक्षा और स्वागत के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बार प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण को भी कांवड़ यात्रा से जोड़ने की विशेष योजना बनाई है। प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को प्रसाद के साथ पौधे भी वितरित किए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि यदि श्रद्धालु इन पौधों को अपने घर, गांव या सार्वजनिक स्थानों पर लगाते हैं तो इससे हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी व्यापक स्तर पर पहुंचेगा।
अधिकारियों के अनुसार, पौधों के वितरण के लिए वन विभाग और उद्यान विभाग के सहयोग से विशेष व्यवस्था की जा रही है। ऐसे पौधों का चयन किया जाएगा जिनका संरक्षण और रखरखाव आसानी से किया जा सके। श्रद्धालुओं से पौधों की नियमित देखभाल करने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कांवड़ यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत करने की तैयारी की है। प्रमुख मंदिरों, कांवड़ मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी, जबकि ड्रोन से भी भीड़ और यातायात की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान भी तैयार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग को भी यात्रा के दौरान पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। कांवड़ मार्गों पर प्राथमिक उपचार केंद्र, एंबुलेंस और चिकित्सा टीमों की तैनाती की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी।
नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि कांवड़ मार्गों और मंदिरों के आसपास नियमित सफाई अभियान चलाया जाए। जलभराव, कचरा और अन्य समस्याओं का समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। बिजली विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने तथा लोक निर्माण विभाग को सड़कों की मरम्मत और बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखा जाएगा।
स्थानीय धार्मिक संगठनों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान है, जबकि पौधों का वितरण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे धार्मिक आयोजन के माध्यम से समाज में प्रकृति संरक्षण का संदेश भी पहुंचेगा।
बरेली, जिसे नाथ नगरी के नाम से भी जाना जाता है, सावन के महीने में शिवभक्तों की भारी आस्था का केंद्र बन जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु विभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए यादगार बने।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे यात्रा के दौरान यातायात नियमों का पालन करें, प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें और पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में भागीदारी निभाते हुए प्रसाद के रूप में मिलने वाले पौधों का रोपण अवश्य करें। इस पहल के जरिए धार्मिक परंपरा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।





