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उत्तर प्रदेश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी विवाद पर बरेली नगर मजिस्ट्रेट का इस्तीफा, बताया जान का खतरा
SHIDDHANT
26 Jan 2026 11:56 PM IST

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Bareilly बरेली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक नाटकीय घटनाक्रम में बरेली नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के तहत पूजनीय संतों के साथ किए जा रहे व्यवहार और कथित तौर पर उच्च जातियों के साथ भेदभाव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि उनका यह निर्णय किसी व्यक्तिगत या व्यावसायिक स्वार्थ के बजाय 'आत्मसम्मान,' अंतरात्मा, और समाज के प्रति जवाबदेही पर आधारित है।
अपने इस्तीफे पत्र में उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में हुई घटना की कड़ी निंदा की, जहां मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान के लिए संगम में प्रवेश को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें बालों से घसीटा गया। इस कृत्य को ब्राह्मणों और संतों का घोर अपमान बताते हुए अग्निहोत्री ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन मौन रूप से उत्पीड़न का समर्थन कर रहा है।
उन्होंने पत्र में भी कड़े शब्दों का प्रयोग किया, जिसे उन्होंने लक्षित उत्पीड़न और भेदभाव करार दिया। उन्होंने इस घटना को मानवता पर कलंक बताया। इस विवाद को व्यापक शिकायतों से जोड़ते हुए अग्निहोत्री ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 की आलोचना की।
उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रावधान, विशेष रूप से अनुच्छेद 2, 5, 6 और 7, सामान्य वर्ग के छात्रों, विशेषकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार समुदायों के छात्रों के खिलाफ शोषणकारी और भेदभावपूर्ण हैं। इन दिशा-निर्देशों की तुलना औपनिवेशिक काल के रॉलेट एक्ट (1919) से करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग साजिशों और झूठे मामलों के माध्यम से उच्च जाति के युवाओं को परेशान करने और निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
वहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जिला प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मुझे वार्ता के लिए बुलाया था। जिलाधिकारी ने पुलिस कप्तान को फोन कर बुलाया। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान मुझे छुट्टी जाने के लिए कहा गया और प्रलोभन दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका आशय मेरे त्यागपत्र को एसआईआर के दबाव से जोड़ना था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुझे बंधक बनाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन मैं किसी तरह वहां से बाहर आ गया। उन्होंने कहा कि मुझे जान का खतरा है, इसलिए मुझे आवास खाली करना पड़ेगा।
उन्होंने मीडिया के माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल से अपील की कि मैंने स्वेच्छा से त्यागपत्र दिया है, लेकिन मुझे मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित करने का प्रयास किया गया। मेरे त्यागपत्र को एसआईआर के दबाव से जोड़ने का प्रयास किया गया। मेरे इस्तीफे को दूसरी तरफ मोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि मुझे बुलाकर बंधक बनाने का प्रयास किया गया, जो सीधे-सीधे लोकतंत्र की हत्या है
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