उत्तर प्रदेश

CM योजना में बैंक सुस्त, प्रशासन ने कसा शिकंजा

Ratna Netam
18 July 2026 4:03 PM IST
CM  योजना में बैंक सुस्त, प्रशासन ने कसा शिकंजा
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Saharanpur सहारनपुर : युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना को बैंकों के असहयोग के कारण बड़ा झटका लग रहा है। योजना के तहत युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाना है, लेकिन बैंक स्तर पर धीमी प्रक्रिया और ऋण स्वीकृति में देरी के चलते योजना की रफ्तार काफी धीमी हो गई है।

सहारनपुर जनपद में योजना की स्थिति को लेकर संयुक्त निदेशक उद्योग वीरेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि जिले में मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना के तहत 2900 लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस योजना का लाभ लेने के लिए कुल 2444 युवाओं ने आवेदन किया, लेकिन इनमें से केवल 412 युवाओं के ऋण ही स्वीकृत हो सके। वहीं, अब तक सिर्फ 408 लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, सहारनपुर में योजना के लक्ष्य का मात्र 14.07 प्रतिशत ही हासिल हो पाया है। यानी बड़ी संख्या में आवेदन आने के बावजूद अधिकांश युवा अभी भी ऋण मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे योजना के उद्देश्य पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिल पा रही है।

सहारनपुर मंडल के अन्य जिलों में भी योजना की प्रगति संतोषजनक नहीं रही है। मुजफ्फरनगर में योजना की सफलता दर केवल 10.84 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि शामली में यह आंकड़ा 13.8 प्रतिशत है। इन आंकड़ों को लेकर प्रशासन ने चिंता जताई है और बैंकों से प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील की है।

योजना की समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि प्रशासन लाभार्थियों के मामलों की जांच कर सूची तैयार कर रहा है, ताकि पात्र युवाओं को जल्द से जल्द योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे अनावश्यक आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया को धीमा न करें और निर्धारित योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को शीघ्र ऋण उपलब्ध कराएं।

मंडलायुक्त ने कहा कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाएगा, जब बैंक और संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करेंगे। उन्होंने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित आवेदनों की समीक्षा कर जल्द निर्णय लिया जाए।

उद्योग विभाग के निदेशक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक प्रदेश में मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना के तहत डेढ़ लाख लाभार्थियों का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष करीब एक लाख 13 हजार आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से लगभग एक लाख आवेदन बैंकों को भेजे गए, लेकिन अब तक केवल 24,128 मामलों में ही ऋण स्वीकृत हो पाया है।

प्रशासन का कहना है कि योजना का उद्देश्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। इसके तहत युवाओं को उद्योग और स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन ऋण स्वीकृति की धीमी गति के कारण कई युवा अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बैंक स्तर पर आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है। पात्र लाभार्थियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए बैंक अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, युवाओं का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी ऋण मिलने में देरी हो रही है। कई आवेदक लंबे समय से बैंक और विभागों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर ऋण मिल जाए तो वे अपना व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

फिलहाल प्रशासन ने बैंकों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री युवा उद्योग योजना की प्रगति में कितना सुधार आता है और कितने युवाओं को इसका लाभ मिल पाता है।

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