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Ballia: हाई लेवल की ओर बढ़ा जलस्तर, प्रशासन अलर्ट मोड में

बलिया: गंगा नदी की लहरें इन दिनों अपने उफान पर हैं। लाल निशान को पार कर चुका जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
गंगा पार की स्थिति भयावह
विशेषकर गंगा पार के चक्की-नौरंगा इलाके में हालात और भी विकराल होते जा रहे हैं। यहां नदी की धार ने कटार का रूप ले लिया है, जो चक्की-नौरंगा गांव के अस्तित्व को ही निगलने को आतुर दिख रही है। निर्माणाधीन शिव मंदिर के बाद अब सरकारी विद्यालय भी खतरे की जद में आ गया है। गांव के लोग लगातार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
एनडीआरएफ की सक्रियता और प्रशासन की निगरानी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ की टीमें सक्रिय हैं, जो लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। एनएच-31 के दक्षिणी किनारे पर बसे इलाकों में पानी के दबाव को रोकने के लिए बालू की बोरियों से बंधों को मजबूत किया जा रहा है।
तेजी से बढ़ रहा है जलस्तर
शनिवार की शाम गायघाट गेज पर गंगा का जलस्तर 59.100 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यहां नदी प्रति घंटे तीन सेंटीमीटर की गति से बढ़ रही है। पूर्वानुमान के अनुसार, तीन अगस्त की सुबह तक यह जलस्तर 59.650 मीटर तक पहुंच सकता है।
खतरे का निशान : 57.615 मीटर
रिकॉर्ड उच्चतम जलस्तर (2016) : 60.390 मीटर
बस्तियों में घुसा बाढ़ का पानी
जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण सुघरछपरा, जगछपरा, शुक्लछपरा, गरया, गोपालपुर, उदईछपरा, दूबेछपरा, नौरंगा, भुआलछपरा और उपाध्याय टोला जैसे इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। इसके कारण एनएच-31 के दक्षिणी हिस्से में बसी कई बस्तियों और आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों पर भी पानी का खतरा मंडराने लगा है।
बलिया में गंगा की उफनती लहरें प्राकृतिक आपदा का संकेत दे रही हैं। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन स्थानीय लोगों से भी सावधानी और सतर्कता बरतने की अपील की गई है।





