उत्तर प्रदेश

Ballia: डॉ. संजीव कुमार गुप्ता की रिसर्च रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई

Admindelhi1
7 Jun 2025 11:11 AM IST
Ballia: डॉ. संजीव कुमार गुप्ता की रिसर्च रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई
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"अंतरराष्ट्रीय मंच पर बलिया का नाम रोशन"

बलिया: जिले के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी "इम्यूनिटी और होम्योपैथी" पर आधारित शोध रिपोर्ट प्रतिष्ठित International Journal of Research and Analytical Review में प्रकाशित हुई है। यह उपलब्धि किसी भी चिकित्सक के लिए अत्यंत सम्मानजनक मानी जाती है।

होम्योपैथी और इम्यूनोलॉजी का अनूठा समन्वय

डॉ. संजीव की यह रिपोर्ट होम्योपैथिक दवाओं की इम्यूनोमॉडुलेटरी (प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने वाली) क्षमता पर केंद्रित है। उन्होंने अपने शोध में एपिस मेलिफ़िका, हिस्टामिनम, मरक्यूरियस सॉल्यूबिलिस, रस टॉक्सिकोडेंड्रोन और आर्सेनिकम एल्बम जैसी औषधियों का विश्लेषण किया है और इनका प्रभाव IL-6, TNF-α, IFN-γ जैसे साइटोकाइंस, बेसोफिल गतिविधि और ऑक्सीडेटिव तनाव जैसे प्रतिरक्षा मार्करों पर देखा गया।

COVID-19 के संदर्भ में भी उपयोगिता पर विचार

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान आर्सेनिकम एल्बम को रोगनिरोधक के रूप में उपयोगी माना गया। शोध के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि कुछ होम्योपैथिक दवाओं के मापनीय जैविक प्रभाव होते हैं और ये प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावी रूप से मॉड्यूलेट कर सकती हैं।

मुख्यधारा में स्वीकृति की चुनौतियां भी बताई गईं

हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मानकीकृत प्रोटोकॉल, वैज्ञानिक यांत्रिकता की स्पष्टता और बड़े स्तर पर रैंडम परीक्षणों की कमी के कारण होम्योपैथी को मुख्यधारा की चिकित्सा में पूरी स्वीकृति नहीं मिल पा रही है।

भविष्य के शोध की दिशा तय करता लेख

डॉ. संजीव का यह लेख ओमिक्स टेक्नोलॉजी के एकीकरण और पारंपरिक चिकित्सा के साथ मिलकर किए जा सकने वाले अनुसंधानों की सिफारिश करता है। इसका उद्देश्य आधुनिक प्रतिरक्षा चिकित्सा में होम्योपैथी की संभावनाओं पर वैज्ञानिक चर्चा को बढ़ावा देना है।

स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय पहचान

बलिया शहर में भृगु मंदिर के पीछे संजीवनी होमियो हॉल नामक क्लीनिक चलाने वाले डॉ. संजीव, अमरोहा के सिंह साहब होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्राचार्य पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। उनके इस शोध कार्य ने बलिया को अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर नई पहचान दिलाई है।

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