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Baghauli : किसान हरिशंकर यादव ने उगाया दुनिया का सबसे महंगा मियाजाकी आम

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: बघौली क्षेत्र के शिवापार गांव के किसान हरिशंकर यादव ने अपनी मेहनत और लगन से साबित कर दिया कि अगर हौसला और कुछ नया करने का जज्बा हो तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। हरिशंकर की बगिया में इन दिनों दुनिया का सबसे महंगा और दुर्लभ आम, "मियाजाकी", अपनी लालिमा बिखेर रहा है और यह पूरे इलाके में आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बन चुका है।
हरिशंकर यादव ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले अपनी बगिया में मियाजाकी प्रजाति के तीन पौधे रोपे थे। यह जापानी आम अपनी अनोखी मिठास और बड़ी साइज के लिए दुनियाभर में मशहूर है। उन्होंने इन पौधों की देखभाल में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया और इन्हें विशेष देखभाल और पोषण दिया। इसके लिए उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई और उर्वरक के सही संतुलन पर ध्यान रखा।
दो साल की अथक मेहनत के बाद अब उनके तीनों मियाजाकी आम के पेड़ फल देने लगे हैं। इन पेड़ों पर लदे हुए आमों का वजन लगभग 200 से 250 ग्राम तक पहुंच चुका है। हरिशंकर का कहना है कि मियाजाकी आम की खासियत इसका मीठा स्वाद, कोमलता और सुगंध है, जो इसे अन्य आमों से बिल्कुल अलग बनाता है। इस अनोखे आम की वजह से उनके खेत में आने वाले लोग सिर्फ इसकी लालिमा और आकार ही नहीं, बल्कि इसकी कीमत और rarity देखकर भी हैरान रह जाते हैं।
किसान ने यह भी बताया कि मियाजाकी आम दुनिया में सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। जापान में इसकी कीमत कुछ हजार रुपये प्रति आम तक हो सकती है। ऐसे में उन्होंने अपने बाग में इस प्रजाति को लाकर खेती के नए अवसर तलाशने की योजना बनाई। उनका मानना है कि अगर स्थानीय किसान इस तरह की दुर्लभ फसल अपनाएं और सही तरीके से देखभाल करें, तो इससे आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।
हरिशंकर यादव का यह प्रयास न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। बघौली और आसपास के लोग उनके बाग की तरफ आते हैं, तस्वीरें लेते हैं और अपने बच्चों को भी इस दुर्लभ आम की जानकारी देते हैं। यह आम अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
किसान का कहना है कि मियाजाकी आम की खेती में धैर्य और समय की जरूरत होती है। यह पेड़ जल्दी फल नहीं देता, लेकिन नियमित देखभाल और सही तकनीक से इसका उत्पादन उच्च गुणवत्ता वाला और बाजार में महंगा बिकने वाला होता है। हरिशंकर की सफलता यह दर्शाती है कि परंपरागत खेती के साथ-साथ नए और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली फसलों की खेती से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार संभव है।
इस बगिया का अनुभव अन्य किसानों के लिए भी सीख है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की दुर्लभ और महंगी फसलें किसानों को नई तकनीक अपनाने और खेती को व्यवसायिक बनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। हरिशंकर यादव ने साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और नये प्रयोग से मिट्टी भी सोना उगल सकती है।





