उत्तर प्रदेश

दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला को जमानत, हाईकोर्ट ने सजा पर लगाई रोक

jantaserishta.com
29 Oct 2026 5:28 PM IST
दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला को जमानत, हाईकोर्ट ने सजा पर लगाई रोक
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नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड रखने के मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को राहत दी है। अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित करने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख चुकी थी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की थीं। दोनों ने याचिकाओं पर अंतिम फैसला आने तक अंतरिम राहत देने की मांग की थी।
उनकी ओर से अदालत से दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया गया था। हाईकोर्ट ने जमानत देने और सजा निलंबित करने की मांग मंजूर कर ली, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में आजम खां की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलीलें पेश कीं।
क्या है दो पैन कार्ड का मामला?
अभियोजन के मुताबिक, आजम खां और अब्दुल्ला आजम पर अलग-अलग जन्मतिथियों का उल्लेख करने वाले दूसरे पैन कार्ड बनवाने और उनका इस्तेमाल करने का आरोप है। आरोप यह भी है कि चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैन कार्ड का इस्तेमाल किया गया था।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को आजम खां और अब्दुल्ला आजम की याचिकाओं को डॉ. तंजीम फातिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़ी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया था।
जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति भी जब्त
आजम खां से जुड़े एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों को जब्त करने की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत की गई।
दी गई जानकारी के अनुसार, जब्त संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये है। इन भवनों के निर्माण पर 426.46 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिनमें से अधिकांश राशि सरकारी बताई गई है। ईडी ने करीब सात साल की जांच के बाद यह कदम उठाया।
यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है। आजम खां ने इस ट्रस्ट की स्थापना की थी और वह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं। ईडी ने रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकियों के आधार पर जांच शुरू की थी। इन मामलों में विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने के आरोप शामिल थे।
सरकारी धन के इस्तेमाल की भी जांच
रामपुर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, गांव सिंघानखेड़ा में शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉटों पर भी अवैध कब्जे का आरोप था। यह जमीन करीब 34 एकड़ बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित पट्टा समझौता रद्द होने के बाद भी कब्जा जारी रहा। गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक ने अब इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।
ईडी की जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित धन विश्वविद्यालय की ओर भेजा गया। आरोप के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निजी परिसर में सरकारी काम कराए गए और सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों से मिली रकम दान के रूप में ट्रस्ट को भेजी गई। इस तरह, दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली राहत के साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति जब्त किए जाने का मामला भी चर्चा में है।
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