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UP में आयुष्मान योजना सख्त, नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर गिरी गाज

Lucknow लखनऊ : उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी, तकनीक आधारित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत मरीजों के इलाज में लापरवाही, अवैध वसूली और वित्तीय अनियमितता करने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
योजना का संचालन करने वाली संस्था साचीज (State Agency for Comprehensive Health Insurance) ने जांच के बाद प्रदेश के ऐसे अस्पतालों पर शिकंजा कसा है, जहां आयुष्मान योजना के नियमों का उल्लंघन पाया गया। अब तक दोषी पाए गए अस्पतालों पर कुल 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इनमें से करीब 60 लाख रुपये की वसूली भी की जा चुकी है।
गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों के भुगतान पर रोक
साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों से अवैध नकद भुगतान लेना, गलत मेडिकल कोड के जरिए अधिक बिल बनाना (अपकोडिंग) और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है।
उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें जांच में सही पाई गईं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है। जुर्माने की शेष राशि वसूलने के लिए संबंधित अस्पतालों के सरकारी भुगतान यानी रिइंबर्समेंट पर रोक लगा दी गई है।
अर्चना वर्मा ने कहा कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को आयुष्मान योजना के पैनल से बाहर करने यानी डी-इम्पैनल करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ लेने वाले मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
800 अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण
सरकार जहां अनियमितता करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई कर रही है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है। इसी क्रम में प्रदेश के 800 अस्पतालों के डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, लखनऊ में आयोजित किया गया। इसमें राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) से मान्यता प्राप्त अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के मानकों के अनुसार काम करने की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली, मरीजों के रिकॉर्ड प्रबंधन, योजना के बेहतर संचालन और तकनीकी समस्याओं के समाधान की जानकारी दी गई। साथ ही अस्पतालों की शिकायतों और तकनीकी परेशानियों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को मिलेगा इंसेंटिव
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि जो अस्पताल एनएबीएच के गुणवत्ता मानकों का बेहतर तरीके से पालन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहन राशि यानी इंसेंटिव भी दिया जाएगा। इससे अस्पतालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
केंद्रीय अस्पतालों को जोड़ने की तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार अब आयुष्मान भारत योजना के नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। इसके तहत केंद्र सरकार के बड़े और प्रतिष्ठित अस्पतालों को भी योजना के नेटवर्क से जोड़ने की कवायद की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे प्रदेश के आयुष्मान लाभार्थियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ और अधिक आसानी से मिल सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर पात्र व्यक्ति को समय पर बेहतर इलाज मिले और योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
योगी सरकार की इस कार्रवाई से साफ है कि आयुष्मान भारत योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।





