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Ayodhya: अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से ग्राम समाधान दिवस हो रहा बेकार

अयोध्या: ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाला ग्राम समाधान दिवस अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते असरहीन साबित हो रहा है। शासन के निर्देशानुसार हर मंगलवार को ग्राम पंचायत स्तर पर समाधान दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसमें गांव से जुड़े विभागों के कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। लेकिन हकीकत यह है कि सचिव के अलावा अन्य विभागों के कर्मचारी अक्सर नदारद रहते हैं, जिससे समाधान दिवस महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है।
कर्मचारियों की गैरमौजूदगी से समाधान दिवस निष्प्रभावी
पूरा बाजार विकासखंड के ग्राम पंचायत सराय चैमल में मंगलवार को पंचायत भवन पर समाधान दिवस का आयोजन हुआ। इसमें केवल सचिव कोमल मिश्रा और पंचायत सहायक ही उपस्थित रहे, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारी नदारद थे। ग्रामीणों की उपस्थिति भी बेहद कम रही। गांव के लक्ष्मीप्रसाद, शिव शंकर, गिरिजा प्रसाद, आसाराम, हरदेव मौर्या, बलराम मौर्य और नौशाद ने बताया कि न तो समाधान दिवस और न ही किसी अन्य सरकारी कार्यक्रम की सूचना उन्हें समय से मिलती है। यही हाल महेशपुर, कर्मा कोडरी, चरेरा, राजेपुर, त्रिहुरा माझा, फतेहपुर मुमताजाबाद, खानपुर, सिरसिण्डा, पिलखावां और सुख्खापुर इटौरा पंचायत भवनों पर भी देखने को मिला, जहां समाधान दिवस में जिम्मेदारों की अनुपस्थिति बनी रही।
खण्ड विकास अधिकारी की फटकार
पंचायत भवन पिलखवां में समाधान दिवस का आयोजन प्रधान राघवेंद्र पांडे की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अनुराग सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीण छठ्ठीराम ने चकमार्ग की पैमाइश और मिट्टी पटाई की मांग रखी, जिसके लिए लेखपाल की आवश्यकता पड़ी। लेकिन मौके पर लेखपाल देश दीपक की अनुपस्थिति से समस्या का समाधान नहीं हो सका।
इस पर खंड विकास अधिकारी अनुराग सिंह भड़क गए और नाराजगी जताते हुए कहा कि कर्मचारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने समाधान दिवस में गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
समाधान दिवस का मकसद ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही के चलते यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा। अब देखना होगा कि बीडीओ के निर्देशों के बाद इसमें कोई सुधार आता है या नहीं।





