उत्तर प्रदेश

सेंट्रल मार्केट केस में राहत का इंतजार ध्वस्तीकरण का खतरा कायम

Ratna Netam
12 Aug 2026 4:50 PM IST
सेंट्रल मार्केट केस में राहत का इंतजार ध्वस्तीकरण का खतरा कायम
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मेरठ : मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों और भवन स्वामियों को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। व्यापारी नेता संजीव मित्तल की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले को सुना। सुनवाई के दौरान व्यापारियों को उम्मीद थी कि सेंट्रल मार्केट से जुड़े 44 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर कोई राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई आदेश सामने नहीं आया। इससे व्यापारियों और भवन स्वामियों की चिंता बनी हुई है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों के संबंध में नई नीति तैयार करने के निर्देश दिए। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि कोर्ट का यह निर्देश व्यापक रूप से अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों के लिए है और इसका सेंट्रल मार्केट के 44 भवनों पर जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं पड़ा है। ऐसे में व्यापारियों की नजर अब मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।
सेंट्रल मार्केट विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा है। गौरतलब है कि 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सेंट्रल मार्केट से जुड़े 44 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था। इन संपत्तियों के मूल उपयोग को आवासीय बताया गया है, लेकिन आरोप है कि बाद में इनमें बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। संबंधित भवनों में स्कूल, नर्सिंग होम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बैंक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का मामला सामने आया था।
मामले में मुख्य विवाद भवनों के मूल स्वीकृत उपयोग और वर्तमान इस्तेमाल को लेकर है। आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा और अलग-अलग स्तरों पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 44 भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित प्राधिकरण की ओर से चिन्हित संपत्तियों का सर्वे कराया जा रहा है। अधिकारियों की टीमें भवनों की मौजूदा स्थिति, निर्माण में किए गए बदलाव, कथित अवैध निर्माण और वर्तमान उपयोग से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं। सर्वे के जरिए यह रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है कि संबंधित भवनों में किस तरह के निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
ध्वस्तीकरण की आशंका के बीच कुछ भवन स्वामियों और आवंटियों ने अपने स्तर पर भी कथित अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई जगहों पर भवनों के मूल स्वरूप में किए गए बदलावों को हटाने का काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े निर्माण और अन्य बदलावों को हटाने की कोशिश की जा रही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि इससे उन्हें आगे की कानूनी प्रक्रिया में कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि व्यापारियों के बीच अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि सेंट्रल मार्केट में लंबे समय से कारोबार कर रहे लोगों और भवन स्वामियों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। व्यापारियों का पक्ष है कि अचानक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से व्यापारी पक्ष न्यायिक माध्यम से अपनी बात रखने और राहत हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
दूसरी ओर संबंधित प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। अधिकारियों की ओर से सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि चिन्हित 44 भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किस तरीके से और कब आगे बढ़ाई जाती है।
बुधवार की सुनवाई के बाद व्यापारियों को तत्काल राहत नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित अगली सुनवाई पर है। मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होने की बात सामने आई है। व्यापारियों और भवन स्वामियों को उम्मीद है कि अगली सुनवाई में उनके पक्ष को विस्तार से सुना जाएगा और मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल सेंट्रल मार्केट के 44 भवनों पर ध्वस्तीकरण का खतरा बरकरार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर सर्वे और अन्य प्रक्रियाएं चल रही हैं, जबकि व्यापारी पक्ष कानूनी विकल्पों के जरिए राहत पाने की कोशिश कर रहा है। अब 21 सितंबर की सुनवाई इस मामले में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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