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198 ग्राम पंचायतों की डिजिटल लाइब्रेरी में QR कोड से लगेगी विद्यार्थियों की हाजिरी

बहराइच। जिले के 14 विकास खंडों की 198 ग्राम पंचायतों में तैयार की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इन लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की हाजिरी अब क्यूआर कोड के माध्यम से लगेगी। विद्यार्थी का क्यूआर कोड स्कैन होते ही उसकी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज हो जाएगी और इससे संबंधित जानकारी सीधे शासन स्तर तक पहुंच जाएगी।
नई व्यवस्था से डिजिटल लाइब्रेरियों में आने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति की ऑनलाइन निगरानी करना संभव होगा। किस लाइब्रेरी में कितने विद्यार्थी पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं और उनकी उपस्थिति कितनी है, इसकी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। इससे डिजिटल लाइब्रेरियों के संचालन और उनके उपयोग की वास्तविक स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी।
जिले में ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 198 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की जा रही हैं। ये लाइब्रेरियां जिले के सभी 14 विकास खंडों की चयनित ग्राम पंचायतों में स्थापित की जा रही हैं। इनमें आधुनिक तकनीक के साथ विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का बेहतर वातावरण तैयार किया गया है।
क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली इस योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल होगी। लाइब्रेरी आने वाले विद्यार्थियों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। स्कैनिंग पूरी होते ही विद्यार्थी की हाजिरी सिस्टम में दर्ज हो जाएगी।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि विद्यार्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। मैन्युअल तरीके से रजिस्टर में हाजिरी दर्ज करने की आवश्यकता कम होगी और लाइब्रेरी के उपयोग से जुड़ी जानकारी भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
विद्यार्थियों की उपस्थिति से संबंधित जानकारी सीधे शासन स्तर तक पहुंचने के कारण इन लाइब्रेरियों की नियमित निगरानी की जा सकेगी। किस ग्राम पंचायत की डिजिटल लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और कहां उपस्थिति कम है, इसकी जानकारी भी ऑनलाइन रिकॉर्ड के जरिए सामने आ सकेगी।
जिले में तैयार की जा रही डिजिटल लाइब्रेरियों को केवल किताबें रखने वाले सामान्य पुस्तकालय के रूप में विकसित नहीं किया जा रहा है। इनमें आधुनिक सुविधाओं और बेहतर साज-सज्जा पर भी ध्यान दिया गया है। लाइब्रेरी के अंदर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था कराई गई है, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिल सके।
लाइब्रेरियों की आंतरिक साज-सज्जा भी विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। कोशिश है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को ऐसा स्थान मिले जहां वे शांत वातावरण में बैठकर पढ़ाई कर सकें। आकर्षक और सुविधाजनक माहौल विद्यार्थियों को नियमित रूप से लाइब्रेरी आने के लिए प्रेरित करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। डिजिटल लाइब्रेरियों में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इससे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे ग्रामीण विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
गांवों में रहने वाले कई विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और पढ़ाई के लिए उचित स्थान उपलब्ध होना बड़ी जरूरत होती है। ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी बनने से उन्हें अपने क्षेत्र में ही अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी।
प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी में कम से कम 25 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थी यहां बैठकर अपनी पढ़ाई कर सकेंगे और उपलब्ध किताबों का उपयोग कर सकेंगे। एक साथ कई विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था होने से गांव के युवाओं को सामूहिक रूप से बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
14 विकास खंडों की 198 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी तैयार होने से बड़ी संख्या में ग्रामीण विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से ऐसे छात्र जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए ये लाइब्रेरियां उपयोगी साबित हो सकती हैं।
क्यूआर कोड से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था से विद्यार्थियों की नियमितता का रिकॉर्ड भी तैयार होगा। लाइब्रेरी में आने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की उपस्थिति डिजिटल सिस्टम में दर्ज होने से यह पता लगाया जा सकेगा कि सुविधाओं का कितने विद्यार्थी नियमित रूप से लाभ उठा रहे हैं।
इससे डिजिटल लाइब्रेरी योजना की निगरानी भी आसान होगी। शासन स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग लाइब्रेरियों में विद्यार्थियों की उपस्थिति की स्थिति देखी जा सकेगी। ऑनलाइन निगरानी होने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। क्यूआर कोड आधारित हाजिरी जहां उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाएगी, वहीं शासन को लाइब्रेरियों के संचालन से जुड़ा वास्तविक आंकड़ा उपलब्ध कराएगी।
इन लाइब्रेरियों में आधुनिक तकनीक, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, बेहतर साज-सज्जा और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा अध्ययन केंद्र उपलब्ध कराना है, जहां वे नियमित रूप से आकर अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
प्रत्येक लाइब्रेरी में कम से कम 25 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था होने से छोटे समूहों में विद्यार्थियों को शांत वातावरण मिलेगा। ग्रामीण युवाओं को पढ़ाई के लिए शहरों या अन्य स्थानों पर निर्भर रहने की जरूरत भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
डिजिटल लाइब्रेरी में क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति व्यवस्था शुरू होने के बाद विद्यार्थियों की हाजिरी का रिकॉर्ड सीधे ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध होगा। इससे लाइब्रेरी के इस्तेमाल का आकलन करना भी आसान हो जाएगा।
जिले की 198 ग्राम पंचायतों में तैयार हो रही इन डिजिटल लाइब्रेरियों के जरिए ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। किताबों और बैठने की सुविधा के साथ डिजिटल निगरानी की व्यवस्था इन पुस्तकालयों को सामान्य ग्रामीण लाइब्रेरी से अलग बनाएगी।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही हाजिरी दर्ज होने और उसकी जानकारी शासन स्तर तक पहुंचने से व्यवस्था की लगातार निगरानी संभव होगी। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और बेहतर अध्ययन वातावरण मिलने से गांव के विद्यार्थियों को अपनी तैयारी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।





