उत्तर प्रदेश

पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी मामले में ATS का एक्शन छह संदिग्धों से पूछताछ

nidhi
1 Nov 2026 9:13 AM IST
पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी मामले में ATS का एक्शन छह संदिग्धों से पूछताछ
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फर्जी ईमेल नेटवर्क
कानपुर: पांच लाख फर्जी ईमेल आईडी बनाने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार अंकित शंखवार से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस ने जांच का दायरा बढ़ाया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, अंकित की निशानदेही पर छह और संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाया गया है। एजेंसी उसके संपर्कों और ईमेल आईडी की खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है। इन छह लोगों को अभी संदिग्ध बताया गया है; उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
एटीएस ने इससे पहले कानपुर के रहने वाले 24 वर्षीय अंकित शंखवार को फर्जी पहचान से ईमेल अकाउंट तैयार करके बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, उसके पास से बरामद लैपटॉप में लगभग पांच लाख ईमेल आईडी का डेटा मिला है। यह मामला स्कूलों और अन्य प्रतिष्ठानों को ईमेल के माध्यम से भेजी गई बम की धमकियों की जांच के दौरान सामने आया। जांचकर्ता अब यह पता लगा रहे हैं कि अकाउंट बनाने, बेचने और उनका इस्तेमाल करने में किन लोगों की भूमिका थी।
रिपोर्ट के अनुसार, अंकित से मिले डिजिटल रिकॉर्ड में एक्सेल फाइलें शामिल हैं। इनमें ईमेल पतों के साथ पासवर्ड, रिकवरी ईमेल और अकाउंट की सुरक्षा से संबंधित जानकारी दर्ज होने का दावा किया गया है। गिरफ्तारी के समय एक मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया था। एटीएस इन उपकरणों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर खरीदारों और संपर्क में रहे लोगों की पहचान करने में जुटी है। बड़ी संख्या में अकाउंट मिलने के कारण उनकी खरीद-बिक्री और इस्तेमाल का आपसी संबंध जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एजेंसी का आरोप है कि अंकित वर्ष 2021 से फर्जी ईमेल आईडी तैयार कर रहा था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, वह फेसबुक समूहों के माध्यम से खरीदारों के संपर्क में आता था और पहचान छिपाने के लिए वाई-फाई तथा प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल करता था। पूछताछ में पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये और मिस्र सहित कई देशों में मौजूद लोगों से संपर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, किसी विदेशी नंबर से संपर्क मिलना और संबंधित व्यक्ति की अपराध में भूमिका प्रमाणित होना अलग-अलग जांच के विषय हैं।
भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। एटीएस के अनुसार, अंकित का संपर्क बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम से फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए हुआ था। एजेंसी का दावा है कि ईमेल आईडी उपलब्ध कराने के बदले उसे 6,000 यूएसडीटी का भुगतान मिला। यूएसडीटी एक डिजिटल टोकन है। जांच में बाइनेंस क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से हुए भुगतान की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इन लेनदेन का ईमेल अकाउंट की आपूर्ति से संबंध जांचा जा रहा है।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू धमकी भरे संदेशों में इस्तेमाल ईमेल अकाउंट हैं। एटीएस के मुताबिक, अंकित के लैपटॉप में उस आईडी से जुड़ी जानकारी मिली, जिसका इस्तेमाल 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई के महापौर कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देने में किया गया था। नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और गुरुग्राम के स्कूलों को धमकी भेजने से संबंधित अकाउंट का डेटा भी मिलने की बात कही गई है। हालांकि, इन संदेशों को वास्तव में किसने भेजा और अंकित की उनमें प्रत्यक्ष भूमिका क्या थी, इसकी जांच जारी है।
दैनिक जागरण की अन्य रिपोर्ट के अनुसार, जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक संपर्कों की कड़ियां सामने आई हैं। आरोप है कि अंकित दो सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी नाम-पतों पर बड़ी संख्या में अकाउंट तैयार करता था। एजेंसी विदेशी खरीदारों, कथित सहयोगियों और अकाउंट इस्तेमाल करने वालों के बीच संबंध तलाश रही है। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश हो रही है कि ईमेल आईडी की आपूर्ति में किसकी क्या भूमिका थी।
कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि मोबाइल और लैपटॉप से कई देशों के नंबरों तथा यूएसडीटी लेनदेन से संबंधित जानकारी मिली है। डिजिटल डेटा की छंटाई करके संदिग्ध संपर्कों की पहचान की जा रही है। संबंधित जानकारी एटीएस के साथ साझा करने की बात भी कही गई है। जांच का उद्देश्य केवल संपर्कों की सूची तैयार करना नहीं, बल्कि उनका कथित कारोबार और धमकी वाले ईमेल से संबंध निर्धारित करना है।
अंकित की निशानदेही पर छह संदिग्धों से पूछताछ की खबर इस जांच में नया घटनाक्रम है। हालांकि, उनकी पहचान, उनसे मिली जानकारी और संभावित भूमिका का विस्तृत पुष्ट विवरण अभी सामने नहीं आया है। फिलहाल जांच का केंद्र ईमेल अकाउंट तैयार करने वालों से लेकर खरीदारों और अंतिम इस्तेमाल करने वालों तक की कड़ी स्थापित करना है। पूछताछ के लिए उठाए गए लोगों की भूमिका पर आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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