उत्तर प्रदेश

Traction 2026 में आइडिया से बिजनेस तक का मिला मंत्र

Ratna Netam
4 Oct 2026 6:50 PM IST
Traction 2026 में आइडिया से बिजनेस तक का मिला मंत्र
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वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (BHU), वाराणसी में तीन दिवसीय एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम ‘ट्रैक्शन 2026’ (Traction 2026) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 2 से 4 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, इनोवेटर्स, भविष्य के उद्यमियों और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को अपने आइडिया को व्यावहारिक और टिकाऊ बिजनेस वेंचर में बदलने की प्रक्रिया से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का आयोजन IIT (BHU) के ‘सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप’ (CIIE) ने ‘आइडिएशन इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन (I-3) फाउंडेशन’ (I3F), ‘जॉइंट इनक्यूबेशन सेंटर’ (JIC) और IIT (BHU) के ‘E-सेल’ के सहयोग से किया। तीन दिनों तक चले कार्यक्रम में उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और प्रतिभागियों को स्टार्टअप स्थापित करने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।
‘ट्रैक्शन 2026’ को इस तरह तैयार किया गया था कि कोई प्रतिभागी अपने शुरुआती विचार से आगे बढ़ते हुए उसे एक संभावित बिजनेस मॉडल में बदलने की पूरी प्रक्रिया को समझ सके। कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद पर विशेष जोर दिया गया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने सबसे पहले किसी वास्तविक समस्या की पहचान और उसके सत्यापन की प्रक्रिया को समझा। स्टार्टअप की दुनिया में केवल नया विचार होना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि यह समझना भी जरूरी होता है कि जिस समस्या के समाधान के लिए उत्पाद या सेवा तैयार की जा रही है, वह वास्तव में ग्राहकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से कार्यक्रम में प्रॉब्लम आइडेंटिफिकेशन और वैलिडेशन को शुरुआती चरण में प्रमुख स्थान दिया गया।
इसके बाद कस्टमर डिस्कवरी यानी संभावित ग्राहकों की पहचान और उनकी जरूरतों को समझने पर काम किया गया। प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि किसी भी नए उद्यम की सफलता के लिए अपने लक्षित ग्राहकों की अपेक्षाओं, समस्याओं और व्यवहार को जानना जरूरी है। ग्राहक क्या चाहता है और वह किसी उत्पाद या सेवा के लिए भुगतान करने को क्यों तैयार होगा, जैसे सवालों को बिजनेस मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मिनिमम वायबल प्रोडक्ट यानी MVP तैयार करने से जुड़ा रहा। इसके तहत प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि शुरुआती चरण में किसी उत्पाद के सबसे जरूरी फीचर्स की पहचान कैसे की जाए और सीमित संसाधनों के साथ उसका ऐसा शुरुआती संस्करण कैसे तैयार किया जाए, जिसकी मदद से बाजार और ग्राहकों की प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके।
प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर आयोजित सत्रों में किसी विचार को वास्तविक उत्पाद या सेवा में बदलने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। इसमें तकनीकी पहलुओं के साथ उपयोगकर्ता की जरूरतों और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पाद विकसित करने के महत्व को समझाया गया। प्रतिभागियों ने अपने आइडिया पर चरणबद्ध तरीके से काम करते हुए यह जानने की कोशिश की कि एक उपयोगी उत्पाद तैयार करने के लिए किन बिंदुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इसके साथ ही बिजनेस स्ट्रेटेजी और गो-टू-मार्केट स्ट्रेटेजी कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में शामिल रहे। किसी स्टार्टअप का उत्पाद तैयार हो जाने के बाद उसे बाजार में कैसे उतारा जाए, संभावित ग्राहकों तक कैसे पहुंचा जाए और प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी अलग पहचान कैसे बनाई जाए, इन पहलुओं पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया गया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में फंड जुटाने की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया। शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स के सामने पूंजी की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में प्रतिभागियों को स्टार्टअप के लिए निवेश की जरूरत समझने, फंडिंग के लिए तैयारी करने और निवेशकों के सामने अपने बिजनेस आइडिया को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने जैसे पहलुओं से परिचित कराया गया।
‘ट्रैक्शन 2026’ की खासियत इसका गहन और इंटरैक्टिव प्रारूप रहा। अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ आयोजित सत्रों ने प्रतिभागियों को उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर दिया। कार्यक्रम को केवल व्याख्यानों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि प्रतिभागियों को अपने विचारों पर लगातार काम करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इस तरह समस्या की पहचान से शुरू हुई प्रक्रिया कस्टमर वैलिडेशन, MVP, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, बिजनेस मॉडल, बाजार रणनीति और फंडिंग तक पहुंची। इससे प्रतिभागियों को स्टार्टअप तैयार करने के पूरे सफर की एक व्यवस्थित समझ मिली।
IIT (BHU) जैसे तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के उद्यमिता कार्यक्रम छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कई बार शिक्षण संस्थानों में विकसित होने वाले तकनीकी विचार और शोध प्रयोगशाला तक सीमित रह जाते हैं। इनक्यूबेशन और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े कार्यक्रम ऐसे विचारों को बाजार की जरूरतों से जोड़कर व्यावसायिक रूप देने की दिशा में मदद कर सकते हैं।
कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों और शोधकर्ताओं की भागीदारी ने अकादमिक शोध और उद्यमिता के बीच संबंध को भी मजबूत किया। वहीं शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को अपने बिजनेस मॉडल और उत्पाद रणनीति की समीक्षा करने का अवसर मिला। भविष्य में स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे प्रतिभागियों के लिए यह कार्यक्रम उद्यमिता की चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझने का मंच बना।
तीन दिनों तक चले ‘ट्रैक्शन 2026’ के समापन के साथ प्रतिभागियों ने स्टार्टअप स्थापित करने की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी हासिल की। समस्या की पहचान से लेकर उत्पाद तैयार करने, ग्राहक खोजने, बाजार में उतरने और निवेश जुटाने तक के विषयों को शामिल कर कार्यक्रम ने इनोवेशन को उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया।

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