उत्तर प्रदेश

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने काशी विश्वनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन

Kavita2
22 Aug 2026 3:04 PM IST
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने काशी विश्वनाथ मंदिर में किया दर्शन-पूजन
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शनिवार सुबह वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने मंदिर पहुंचकर भगवान विश्वेश्वर के दर्शन किए और गर्भगृह में विधि-विधान से जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना की। इस दौरान कैंट विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव भी उनके साथ मौजूद रहे।

सतीश महाना सुबह करीब आठ बजे मंदिर परिसर पहुंचे। इसके बाद मंदिर की परंपराओं के अनुसार उन्होंने पूजा-अर्चना की। लगभग 8:30 बजे उन्हें गर्भगृह में ले जाया गया, जहां उन्होंने भगवान विश्वेश्वर का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में पूजा के दौरान धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

गर्भगृह में किया भगवान विश्वेश्वर का पूजन

काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का दर्शन किया। गर्भगृह में उन्होंने जलाभिषेक के साथ विधि-विधान से पूजा की। मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना के दौरान विशेष अनुष्ठान भी किए गए।

काशी विश्वनाथ मंदिर में देशभर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष का यह दौरा भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया। दर्शन-पूजन के दौरान मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखी गईं।

विधायक ने किया स्वागत

पूजन कार्यक्रम पूरा होने के बाद कैंट विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने मंदिर के वीआईपी लाउंज में सतीश महाना का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया।

स्वागत के दौरान मंदिर प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंदिर की व्यवस्थाओं और दर्शन-पूजन से संबंधित प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी।

सतीश महाना के मंदिर आगमन को लेकर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद अधिकारियों और अन्य लोगों से भी मुलाकात की।

धार्मिक आस्था के प्रति श्रद्धा का संदेश

सतीश महाना का काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति उनकी श्रद्धा से जोड़कर देखा जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष स्थान है। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस मंदिर में दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष के दौरे के दौरान भी मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल रहा। उन्होंने भगवान विश्वेश्वर के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

मंदिर प्रशासन रहा मौजूद

दर्शन-पूजन के दौरान मंदिर प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष के मंदिर आगमन और पूजा-अर्चना से जुड़ी व्यवस्थाओं का समन्वय किया।

पूजन के बाद वीआईपी लाउंज में हुए स्वागत कार्यक्रम में भी मंदिर प्रशासन के अधिकारी शामिल रहे। विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने अंगवस्त्रम भेंट कर विधानसभा अध्यक्ष का अभिनंदन किया।

काशी दौरे में धार्मिक पहलू रहा प्रमुख

सतीश महाना के वाराणसी दौरे में शनिवार सुबह का कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक रहा। उन्होंने सुबह के समय मंदिर पहुंचकर भगवान विश्वेश्वर का जलाभिषेक किया। इस दौरान उनके साथ स्थानीय भाजपा विधायक की मौजूदगी भी रही।

दर्शन के बाद मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम पूरा किया गया और इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष आगे के कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।

काशी में धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट लोगों की परंपरा रही है। इसी क्रम में सतीश महाना का काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचना भी देखा गया।

काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष महत्व

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और विश्वनाथ मंदिर यहां की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन और जलाभिषेक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

सतीश महाना ने भी मंदिर की इसी धार्मिक परंपरा के अनुरूप भगवान विश्वेश्वर का जलाभिषेक और पूजन किया। मंदिर परिसर में दर्शन के बाद उनका स्वागत भी परंपरागत तरीके से किया गया।

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव और मंदिर प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। पूजा-अर्चना और स्वागत कार्यक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष का मंदिर दौरा संपन्न हुआ। उनका यह दौरा काशी की धार्मिक परंपरा और भगवान विश्वनाथ के प्रति आस्था से जुड़ा रहा।

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