- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- सड़कों पर सख्ती बढ़ी...
सड़कों पर सख्ती बढ़ी तो ट्रेनों की ओर मुड़ा ड्रग्स नेटवर्क

लखनऊ। सड़कों पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क ने अब अपना रास्ता बदलना शुरू कर दिया है। लंबी दूरी की ट्रेनों को तस्करी के नए कारिडोर के रूप में इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। एजेंसियों की हालिया कार्रवाई से संकेत मिले हैं कि तस्कर सड़क मार्ग की अपेक्षा रेल नेटवर्क को अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प मानकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि सिंडिकेट के लोग तस्करी के लिए कैरियर के तौर पर महिलाओं और स्थानीय लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हाल के दिनों में विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की अलग-अलग कार्रवाई में तस्करी से जुड़े मामलों में चार महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क का नया चेहरा सामने आया है। गिरफ्तार महिलाओं में एक नाइजीरियाई महिला भी शामिल है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कैरियर को नेटवर्क से कौन जोड़ता है और इनके पीछे बैठे मुख्य संचालक कौन हैं।
सड़क मार्ग पर सख्ती से बदली रणनीति
ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सड़क मार्गों पर लगातार चेकिंग और निगरानी बढ़ाई गई है। अंतरराज्यीय सीमाओं, प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की जांच के चलते तस्करों के लिए पहले की तरह आसानी से नशीले पदार्थ ले जाना मुश्किल हुआ है।
एजेंसियों का मानना है कि इसी वजह से तस्करी नेटवर्क ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की बड़ी संख्या और लगातार बदलते यात्री समूह के बीच संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना सड़क मार्ग की तुलना में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी का फायदा उठाने की कोशिश तस्करों द्वारा की जा रही है।
महिलाओं को बनाया जा रहा कैरियर
जांच में सामने आए मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। तस्करी के लिए महिलाओं को कैरियर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एजेंसियों के मुताबिक, महिलाओं को नेटवर्क में शामिल करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। तस्कर यह मानकर चल सकते हैं कि सामान्य यात्रियों के बीच महिलाओं की तलाशी अपेक्षाकृत कम सख्ती से होगी या उन पर कम संदेह किया जाएगा।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने अब इस पैटर्न पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है। हालिया मामलों में चार महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। इनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें किसने सामान दिया, किस स्थान तक पहुंचाना था और यात्रा के दौरान नेटवर्क के अन्य सदस्यों से उनका संपर्क किस माध्यम से होता था।
नाइजीरियाई महिला की गिरफ्तारी से बढ़ी चिंता
इस नेटवर्क में एक नाइजीरियाई महिला की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विदेशी नागरिक की संलिप्तता से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका मजबूत हुई है। जांच एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों और भारत में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क के बीच संभावित कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट आम तौर पर अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जोड़कर काम करते हैं। ऊपर बैठे संचालक सीधे तस्करी में शामिल हुए बिना स्थानीय स्तर पर कैरियर और संपर्कों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए अहम माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का भी इस्तेमाल
सिर्फ महिलाओं ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को भी तस्करी नेटवर्क में कैरियर के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों को मार्ग, रेलवे स्टेशन और क्षेत्र की जानकारी होने के कारण तस्कर उन्हें आसानी से नेटवर्क का हिस्सा बना सकते हैं।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि स्थानीय कैरियर किस तरह मुख्य नेटवर्क से संपर्क में रहते हैं। इसके लिए मोबाइल संपर्क, यात्रा विवरण और संदिग्ध लेनदेन जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है। एजेंसियों का फोकस केवल सामान बरामद करने और कैरियर को पकड़ने तक सीमित न रहकर नेटवर्क के मुख्य संचालकों तक पहुंचने पर है।
लंबी दूरी की ट्रेनें बनी चुनौती
लंबी दूरी की ट्रेनों में एक राज्य से दूसरे राज्य तक बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। ऐसे में तस्करी नेटवर्क के लिए एक ही यात्रा में लंबी दूरी तय करना संभव हो जाता है। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियों ने रेलवे मार्गों पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की है।
ट्रेन में तस्करी के मामलों की जांच में एजेंसियों को कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। संदिग्ध यात्रियों की पहचान के साथ उनके यात्रा रिकॉर्ड, संपर्कों और संभावित गंतव्य की भी जांच जरूरी होती है। कई बार कैरियर को खुद यह जानकारी नहीं होती कि वह जिस सामान को ले जा रहा है, उसका अंतिम संचालक कौन है।
एसटीएफ और डीआरआई की कार्रवाई से खुली परत
हाल के मामलों में एसटीएफ और डीआरआई की कार्रवाई ने तस्करी नेटवर्क की कार्यप्रणाली की नई परत सामने रखी है। चार महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद एजेंसियों को यह संकेत मिला है कि तस्कर पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नए रास्तों और नए कैरियर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब एजेंसियां रेलवे स्टेशनों और प्रमुख रेल मार्गों पर भी संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी में हैं। साथ ही अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचना चुनौती
तस्करी के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती कैरियर के पीछे मौजूद मुख्य संचालकों तक पहुंचना होती है। अक्सर कैरियर केवल सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते हैं, जबकि पूरा नेटवर्क दूसरे स्तर से संचालित होता है। ऐसे में केवल कैरियर की गिरफ्तारी से तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है।
एजेंसियां गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की अगली कड़ी तलाश रही हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ तस्करी के इस नए रेल कारिडोर और उसके पीछे सक्रिय अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल सड़कों पर बढ़ी सख्ती के बाद ट्रेनों को तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने के संकेत सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गए हैं। महिलाओं और स्थानीय लोगों को कैरियर बनाने की रणनीति ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल नशीले पदार्थों की खेप पकड़ने की नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की है जो अलग-अलग रास्तों और चेहरों के जरिए तस्करी के कारोबार को संचालित कर रहा है।





