उत्तर प्रदेश

वाराणसी के आर्यन ने लहराया परचम, NEET में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 7

Saba Naaz
17 July 2026 4:02 PM IST
वाराणसी के आर्यन ने लहराया परचम, NEET में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 7
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वाराणसी। काशी के मेधावी छात्र आर्यन दुबे ने नीट यूजी 2026 में शानदार सफलता हासिल कर वाराणसी और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आर्यन ने री-नीट परीक्षा में पूरे देश में सातवां स्थान और उत्तर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षकों और शहरवासियों में खुशी का माहौल है।

आर्यन दुबे ने नीट परीक्षा में 720 में से 710 अंक हासिल किए हैं। इस परीक्षा में देशभर से 24 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। आर्यन अब देश के प्रतिष्ठित संस्थान एम्स नई दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई कर न्यूरोसर्जन बनने का सपना पूरा करना चाहते हैं।

आर्यन वाराणसी स्थित आईआईटी बीएचयू के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर और संस्थान के पूर्व डीन (शोध एवं विकास) डॉ. विकास कुमार दुबे के पुत्र हैं। उनकी सफलता के बाद परिवार को लगातार बधाइयां मिल रही हैं।

आर्यन की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और नियमित अध्ययन रहा है। उन्होंने कोचिंग की पढ़ाई के अलावा रोजाना सात से आठ घंटे घर पर स्वाध्याय किया। कोचिंग में भी वह पांच से छह घंटे नियमित समय देते थे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता डॉ. मोनू पांडेय, पिता डॉ. विकास कुमार दुबे, कोचिंग शिक्षकों और होम ट्यूटर आरिफ खान सर को दिया है।

आर्यन ने इससे पहले इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने जेईई मेन में 99.699 पर्सेंटाइल हासिल किया था, लेकिन उन्होंने इंजीनियरिंग की जगह चिकित्सा क्षेत्र को अपना लक्ष्य बनाया।

आर्यन की स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल से हुई है। उन्होंने 10वीं कक्षा में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में टॉप किया था। वहीं, 12वीं में 98.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विज्ञान वर्ग में टॉपर रहे थे।

आर्यन को डॉक्टर बनने की प्रेरणा अपने दादाजी से मिली, जो खुद रिटायर्ड सर्जन हैं। उनके दादा-दादी बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया में रहते हैं। परिवार में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ाव ने आर्यन को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

आर्यन की मां डॉ. मोनू पांडेय का भी शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी और वैज्ञानिक के रूप में करियर शुरू किया था। हालांकि, बच्चों की पढ़ाई और देखभाल के लिए उन्होंने कुछ समय के लिए अपने करियर से ब्रेक लिया।

आर्यन के पिता डॉ. विकास कुमार दुबे ने बताया कि इससे पहले हुई नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आर्यन काफी निराश हुए थे। पिछली परीक्षा में उन्होंने 220 में से 215 अंक हासिल किए थे। दोबारा हुई परीक्षा में उनके अंक कुछ कम रहे, लेकिन बेहतर रैंक हासिल हुई।

उन्होंने बताया कि नीट परिणाम में चौथी से सातवीं रैंक तक के विद्यार्थियों के अंक समान थे। टाई ब्रेक नियम के कारण आर्यन को सातवां स्थान मिला।

आर्यन ने फिजिक्स और केमिस्ट्री में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे 180-180 अंक हासिल किए। बायोलॉजी में केवल दो प्रश्न गलत हुए। उनकी सफलता में शिक्षकों और मार्गदर्शकों का भी अहम योगदान रहा।

वाराणसी के इस होनहार छात्र की उपलब्धि ने युवाओं के लिए प्रेरणा का काम किया है। आर्यन अब एम्स दिल्ली में प्रवेश लेकर चिकित्सा क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की तैयारी करेंगे और एक कुशल न्यूरोसर्जन बनने के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगे।

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