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उत्तर प्रदेश
गोरखपुर विश्वविद्यालय को मिला नया मुखिया नियुक्ति आदेश जारी
Ratna Netam
5 Sept 2026 2:14 PM IST

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए कुलपति को लेकर इंतजार जारी है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन का तीन साल का कार्यकाल 3 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन नए कुलपति की नियुक्ति या अंतरिम व्यवस्था को लेकर राजभवन की ओर से अभी आदेश जारी नहीं हुआ है। इसके चलते विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों की निगाहें राजभवन के फैसले पर टिकी हुई हैं।
कुलपति का कार्यकाल खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति मौजूद हैं, लेकिन विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत उन्हें स्वतः कार्यवाहक कुलपति की सभी शक्तियां नहीं मिल जातीं। कार्यवाहक कुलपति या किसी वरिष्ठ प्रोफेसर को जिम्मेदारी देने के लिए कुलाधिपति एवं राज्यपाल की ओर से निर्देश जरूरी होता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन राजभवन से आने वाले आदेश का इंतजार कर रहा है।
3 सितंबर को खत्म हुआ कार्यकाल
प्रो. पूनम टंडन का तीन वर्षीय कार्यकाल 3 सितंबर को समाप्त हुआ। उम्मीद की जा रही थी कि उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले ही नए कुलपति के नाम की घोषणा हो जाएगी या फिर अंतरिम व्यवस्था को लेकर आदेश जारी कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय में यह चर्चा तेज हो गई कि अब प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों की जिम्मेदारी किसके पास रहेगी।
जन्माष्टमी के अवकाश के कारण शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर बंद रहा, लेकिन नए कुलपति को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का दौर चलता रहा। शनिवार को विश्वविद्यालय खुलने के साथ यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि नियमित कुलपति की गैरमौजूदगी में रोजमर्रा के साथ महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले किस तरह लिए जाएंगे।
करीब 300 आवेदन आए थे
नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार कुलपति पद के लिए करीब 300 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय चयन समिति ने आवेदनों की जांच और प्रारंभिक छंटनी की। इनमें से करीब 30 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए चुना गया।
साक्षात्कार और चयन प्रक्रिया के बाद पांच नामों का पैनल तैयार किया गया। इस पैनल को अंतिम निर्णय के लिए कुलाधिपति के पास भेजा गया। इससे यह उम्मीद बढ़ गई थी कि मौजूदा कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए कुलपति की घोषणा कर दी जाएगी।
पांच उम्मीदवारों का हुआ अंतिम इंटरव्यू
नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है। एक सितंबर को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने पैनल में शामिल पांच उम्मीदवारों का अंतिम साक्षात्कार लिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय में नए कुलपति के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
माना जा रहा था कि इंटरव्यू के बाद जल्द ही किसी एक नाम पर मुहर लग जाएगी। खास तौर पर इसलिए भी जल्द फैसले की उम्मीद थी क्योंकि प्रो. पूनम टंडन का कार्यकाल 3 सितंबर को समाप्त होना था। हालांकि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी नियुक्ति संबंधी फैसला सामने नहीं आने से इंतजार बढ़ गया।
राजभवन के आदेश पर टिकी नजर
विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें स्वतः कार्यवाहक कुलपति के अधिकार नहीं मिलते। नियमों के तहत कुलाधिपति के निर्देश के बाद ही किसी वरिष्ठ प्रोफेसर को कुलपति का प्रभार दिया जा सकता है। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजभवन का फैसला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
कुलपति विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे का सर्वोच्च अधिकारी होता है। नियुक्तियों, महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों, शैक्षणिक नीतियों और विकास परियोजनाओं से जुड़े कई निर्णय कुलपति के स्तर पर लिए जाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक नियमित कुलपति का पद खाली रहने पर महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित होने की आशंका रहती है।
विश्वविद्यालय के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नियुक्ति?
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करते हैं। विश्वविद्यालय से कई महाविद्यालय भी जुड़े हैं। इसलिए शीर्ष प्रशासनिक पद पर स्पष्ट व्यवस्था होना शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
नए शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश, परीक्षाओं, परिणामों, शोध गतिविधियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने होते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने वित्तीय और विकास संबंधी विषय भी रहते हैं। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति को लेकर हो रही देरी विश्वविद्यालय समुदाय के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
चयन प्रक्रिया लगभग पूरी
नए कुलपति के चयन के लिए आवेदन से लेकर उम्मीदवारों के साक्षात्कार तक की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। करीब 300 आवेदनों में से पहले उम्मीदवारों की छंटनी की गई और 30 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के बाद पांच नामों का पैनल बनाया गया। इन पांच उम्मीदवारों का अंतिम साक्षात्कार भी हो चुका है। इसलिए अब मुख्य रूप से अंतिम निर्णय का इंतजार है।
विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि राजभवन जल्द स्थिति स्पष्ट करेगा। आदेश जारी होने के बाद ही साफ होगा कि विश्वविद्यालय को सीधे नया नियमित कुलपति मिलेगा या नई नियुक्ति तक किसी वरिष्ठ शिक्षाविद को कार्यवाहक कुलपति की जिम्मेदारी दी जाएगी।
शिक्षकों और कर्मचारियों में चर्चा तेज
कुलपति की नियुक्ति विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। सभी यह जानना चाहते हैं कि विश्वविद्यालय की कमान अब किसके हाथों में जाएगी। चयन प्रक्रिया अंतिम दौर तक पहुंच जाने के कारण नए कुलपति के नाम को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं।
हालांकि आधिकारिक आदेश जारी होने तक किसी नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता। विश्वविद्यालय प्रशासन को भी राजभवन के औपचारिक निर्देश का इंतजार करना होगा। इसी आदेश के बाद आगे की प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति का पद खाली है। प्रो. पूनम टंडन का कार्यकाल 3 सितंबर को समाप्त हो चुका है और नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पांच उम्मीदवारों का अंतिम साक्षात्कार होने के बाद अब राजभवन के फैसले पर सबकी निगाहें हैं। आने वाला आदेश ही तय करेगा कि विश्वविद्यालय को नया स्थायी कुलपति मिलता है या नियुक्ति होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू की जाती है।
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