उत्तर प्रदेश

वाराणसी में ज्ञानोदय कार्यक्रम में अपर्णा यादव ने कहा

SHIDDHANT
2 Nov 2025 8:53 PM IST
वाराणसी में ज्ञानोदय कार्यक्रम में अपर्णा यादव ने कहा
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BANARAS बनारस: हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित ‘ज्ञानोदय कार्यक्रम’ के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने सनातन धर्म और उसकी मूल शिक्षाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज में सनातन धर्म को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जिनका समाधान केवल बौद्धिक संवाद और सटीक जानकारी के माध्यम से ही संभव है।
सनातन धर्म की मूल भावना पर चर्चा
कार्यक्रम में अपर्णा यादव ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरे विश्व को एक परिवार मानने की भावना सिखाता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कुछ लोगों ने इसके सिद्धांतों की गलत व्याख्या की, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है। इसलिए, अब समय आ गया है कि युवाओं और छात्रों को इस विषय पर सही जानकारी दी जाए।
उन्होंने बताया कि ‘ज्ञानोदय कार्यक्रम’ का उद्देश्य युवाओं में भारतीय संस्कृति, धर्म और दर्शन के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसमें विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और धर्मगुरुओं ने भी हिस्सा लिया और सनातन परंपराओं की वैज्ञानिकता, सामाजिकता और समावेशिता पर विस्तार से चर्चा की।
समाज में सकारात्मक संवाद की आवश्यकता
अपर्णा यादव ने कहा कि किसी भी धर्म को लेकर विवाद या नकारात्मकता फैलाने के बजाय सकारात्मक संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म मानवता, प्रेम, और कर्तव्य की शिक्षा देता है। “कुछ लोग जानबूझकर समाज को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए यह जरूरी है कि बुद्धिजीवी वर्ग आगे आए और सही दिशा दिखाए,” उन्होंने कहा।
महिलाओं की भूमिका पर भी चर्चा
इस अवसर पर अपर्णा यादव ने सनातन संस्कृति में महिलाओं की भूमिका और सम्मान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेदों और उपनिषदों में महिलाओं को ज्ञान, शक्ति और सृजन की प्रतीक के रूप में वर्णित किया गया है। उन्होंने युवतियों से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और समाज में अपनी भूमिका को सशक्त रूप से निभाएं।
विश्वविद्यालय ने सराहा पहल
कार्यक्रम के समापन पर BHU प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों ने महिला आयोग की पहल की सराहना की और ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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