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उत्तर प्रदेश
सांप के डंक पर भारी पड़ा एंटी वेनम 145 लोगों को मिला नया जीवन
nidhi
14 Sept 2026 12:35 PM IST

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एंटी वेनम बना संजीवनी 145 सर्पदंश पीड़ितों की बची जान
शामली: उत्तर प्रदेश के शामली में सर्पदंश के मामलों के बीच एंटी-वेनम पीड़ितों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिले में सांप काटने के बाद अस्पताल पहुंचे 145 लोगों की जान एंटी-वेनम उपचार से बचाई गई, जबकि दो लोगों की मौत हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपायों के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचना कितना महत्वपूर्ण है। बरसात के मौसम में सांप काटने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। खेतों, झाड़ियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सांप निकलने की संभावना अधिक रहती है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोगों के अलावा रात के समय घरों के आसपास भी सर्पदंश का खतरा बना रहता है।
145 पीड़ितों की बचाई गई जान
जानकारी के मुताबिक सर्पदंश के बाद 145 पीड़ितों को अस्पताल में समय पर उपचार मिला। जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम दिए जाने और चिकित्सकीय निगरानी के कारण उनकी जान बचाई जा सकी। हालांकि हर सर्पदंश में एंटी-वेनम देना जरूरी नहीं होता। इसका फैसला मरीज के लक्षण और डॉक्टर की जांच के आधार पर किया जाता है। सांप के जहर का असर शरीर पर अलग-अलग तरीके से हो सकता है। कुछ विषैले सांपों के काटने से सांस लेने में परेशानी, रक्तस्राव, मांसपेशियों में कमजोरी और अन्य गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों का इंतजार करने के बजाय पीड़ित को जल्द चिकित्सा केंद्र पहुंचाना जरूरी है।
दो लोगों की हुई मौत
सर्पदंश से जिले में दो लोगों की जान जाने की जानकारी भी सामने आई है। मौत किन परिस्थितियों में हुई और पीड़ितों को इलाज मिलने में कितना समय लगा, इसकी विस्तृत जानकारी चिकित्सकीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक करते हैं कि सांप काटने के बाद घाव को काटना, जहर चूसने की कोशिश करना या अत्यधिक कसकर पट्टी बांधना नुकसानदायक हो सकता है। पीड़ित को शांत रखते हुए उसके प्रभावित अंग की अनावश्यक गतिविधि कम करना और जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहतर कदम है।
झाड़-फूंक में न गंवाएं समय
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद कई बार लोग पहले झाड़-फूंक या पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। इससे अस्पताल पहुंचने में देरी हो सकती है और विषैले सांप के काटने की स्थिति में मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। सर्पदंश के बाद यह पहचानने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए कि सांप जहरीला था या नहीं। सुरक्षित दूरी से सांप की तस्वीर उपलब्ध हो तो डॉक्टरों के लिए मददगार हो सकती है, लेकिन सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
समय पर इलाज सबसे जरूरी
शामली में 145 सर्पदंश पीड़ितों के सफल उपचार का आंकड़ा समय पर चिकित्सा सहायता के महत्व को सामने लाता है। स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम की उपलब्धता के साथ प्रशिक्षित डॉक्टर और मरीज की लगातार निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है। बरसात के दौरान लोगों को रात में टॉर्च लेकर चलने, खेतों में जूते पहनने और घर के आसपास झाड़ियों को साफ रखने जैसी सावधानियां बरतनी चाहिए। सर्पदंश होने पर सबसे जरूरी कदम बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना है।
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