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हनुमानगंज। हौसले बुलंद हों और लक्ष्य को हासिल करने का जुनून हो तो मुश्किल से मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। जनपद के हनुमानगंज ब्लाक के करनई गांव निवासी पर्वतारोही अनिल यादव ने इसी जज्बे का परिचय देते हुए 7,135 मीटर ऊंचे माउंट नुन की चोटी पर तिरंगा फहराकर जिले और अपने गांव का नाम रोशन किया है। अनिल ने 14 अगस्त 2026 को बर्फीले रास्तों, खराब मौसम और विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
माउंट नुन की चोटी तक पहुंचने का सफर अनिल यादव के लिए आसान नहीं था। ऊंचाई बढ़ने के साथ मौसम की चुनौती, बर्फ से ढके रास्ते और कठिन परिस्थितियां लगातार उनकी परीक्षा लेती रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहे। लंबे प्रशिक्षण, अनुशासन और लगातार अभ्यास का परिणाम रहा कि आखिरकार वह माउंट नुन की चोटी तक पहुंचने में सफल रहे।
अनिल यादव ने बताया कि माउंट नुन पर चढ़ाई करना उनका लंबे समय से सपना था। इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। पर्वतारोहण के लिए जरूरी शारीरिक क्षमता विकसित करने के साथ मानसिक रूप से खुद को कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार किया। लगातार अभ्यास और पिछली कोशिश से मिले अनुभव ने इस अभियान में उनकी मदद की।
उनकी इस सफलता की कहानी में पिछले वर्ष की असफल कोशिश भी महत्वपूर्ण है। अगस्त 2025 में भी अनिल यादव माउंट नुन पर चढ़ाई के लिए गए थे। उस समय उन्होंने चोटी तक पहुंचने का लक्ष्य बनाया था, लेकिन अत्यधिक बर्फबारी के कारण मौसम बेहद खराब हो गया। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि अभियान को लक्ष्य तक पहुंचाना संभव नहीं रहा।
पहले प्रयास में चोटी तक नहीं पहुंच पाने के बावजूद अनिल ने अपने सपने को नहीं छोड़ा। उन्होंने पिछली कोशिश के अनुभव को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उससे सीख ली। वापस लौटने के बाद उन्होंने दोबारा प्रशिक्षण शुरू किया और उन चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया, जिनका सामना उन्हें पहले अभियान के दौरान करना पड़ा था।
करीब एक साल बाद अगस्त 2026 में वह फिर माउंट नुन अभियान के लिए निकले। इस बार उनका लक्ष्य स्पष्ट था। रास्ते में बर्फ और बदलता मौसम बड़ी चुनौती बने रहे, लेकिन वह लगातार आगे बढ़ते गए। आखिरकार 14 अगस्त को वह 7,135 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट नुन की चोटी पर पहुंच गए।
चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराकर अपनी उपलब्धि को यादगार बना दिया। स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले मिली इस सफलता ने उनके अभियान को और खास बना दिया। पर्वत की ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने का क्षण उनके लिए लंबे समय की मेहनत, संघर्ष और इंतजार का परिणाम था।
पर्वतारोहण में केवल शारीरिक मजबूती ही पर्याप्त नहीं होती। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, बेहद कम तापमान, बर्फीले रास्ते और अचानक बदलने वाला मौसम पर्वतारोहियों के सामने बड़ी चुनौतियां पैदा करते हैं। ऐसे माहौल में प्रत्येक कदम सावधानी के साथ आगे बढ़ाना होता है। अनिल ने इन तमाम चुनौतियों के बीच अपने धैर्य को बनाए रखा।
उनकी उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद करनई गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों के लिए यह गौरव का अवसर है कि गांव के एक युवक ने कठिन पर्वतारोहण अभियान पूरा करते हुए माउंट नुन की चोटी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
अनिल यादव की सफलता उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने का सपना देखते हैं। उनका सफर बताता है कि किसी अभियान में मिली पहली असफलता अंतिम परिणाम नहीं होती। 2025 में मौसम ने उनका रास्ता रोक दिया था, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी और अगले ही वर्ष उसी लक्ष्य को हासिल कर लिया।
अनिल का कहना है कि इस सफलता के पीछे लंबे समय तक की गई तैयारी और निरंतर अभ्यास की अहम भूमिका रही। पर्वतारोहण के दौरान परिस्थितियां हर समय अनुकूल नहीं रहतीं, इसलिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी जरूरी होती है। खराब मौसम के बीच संयम बनाए रखना और सही समय पर सही निर्णय लेना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
माउंट नुन की चोटी पर तिरंगा फहराकर अनिल ने अपने लंबे समय से देखे जा रहे सपने को पूरा किया है। उनके लिए यह उपलब्धि केवल एक पर्वत की चोटी तक पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले प्रयास में मिली निराशा के बाद दोबारा खड़े होकर लक्ष्य हासिल करने की कहानी भी है।
14 अगस्त 2026 का दिन अब अनिल यादव के पर्वतारोहण सफर में विशेष स्थान रखेगा। 7,135 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर तिरंगा फहराने के साथ उन्होंने साबित किया कि लगातार मेहनत, मजबूत इच्छाशक्ति और धैर्य के सहारे कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और गांव के साथ पूरे जनपद का गौरव बढ़ा है।





