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नौकरी नहीं मिलने से नाराज युवाओं ने दिया धरना, पुलिस चौकी ले गई; पैदल घर लौटने का आरोप

लखनऊ। नौकरी और रोजगार नहीं मिलने से परेशान पॉलीटेक्निक, आईटीआई, स्नातक और परास्नातक पास कई युवक-युवतियां बुधवार को राजधानी लखनऊ के मड़ियांव स्थित मेला मैदान में धरने पर बैठ गए। युवाओं ने हाथों में चार्ट पेपर पर लिखे नारे लेकर रोजगार की मांग उठाई। धरने की सूचना मिलते ही मड़ियांव पुलिस मौके पर पहुंची और बिना अनुमति धरना देने को लेकर युवाओं से पूछताछ की। बाद में पुलिस उन्हें चौकी ले गई। युवाओं का आरोप है कि करीब एक घंटे बाद उन्हें ई-रिक्शे से रिंग रोड स्थित टेढ़ी पुलिया के पास छोड़ दिया गया और किराए के पैसे नहीं होने के कारण कुछ लोगों को पैदल घर जाना पड़ा।
धरने में शामिल युवक-युवतियों का कहना था कि पढ़ाई और तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। रोजगार की तलाश में लगातार प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलने से वे परेशान हैं। कई युवाओं ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और नौकरी नहीं मिलने के कारण उन्हें घर में भी सवालों और तानों का सामना करना पड़ रहा है।
युवाओं ने अपनी समस्याओं को सामने रखने के लिए चार्ट पेपर पर अलग-अलग नारे लिख रखे थे। उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे। मेला मैदान में युवाओं के जुटने और धरना शुरू करने की सूचना जैसे ही स्थानीय पुलिस को मिली, पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने उनसे धरने की अनुमति के बारे में जानकारी मांगी।
पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति धरना आयोजित करने को लेकर युवक-युवतियों से सवाल-जवाब किए। इस दौरान युवाओं ने अधिकारियों को बताया कि वे बेरोजगारी और नौकरी नहीं मिलने की समस्या से परेशान होकर यहां आए हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को अपने हाथों में मौजूद तख्तियां भी दिखाईं और रोजगार से जुड़ी अपनी परेशानियां बताईं।
इसके बाद पुलिस धरने में शामिल युवाओं को अपने साथ चौकी ले गई। बताया गया कि वहां उनसे करीब एक घंटे तक बातचीत और पूछताछ हुई। इसके बाद उन्हें ई-रिक्शे में बैठाकर रिंग रोड स्थित टेढ़ी पुलिया के पास छोड़ दिया गया। युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें उस स्थान से आगे जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं दी गई।
धरने में शामिल कुछ युवाओं का दावा है कि उनके पास सार्वजनिक परिवहन या दूसरे साधन से घर लौटने के लिए किराए के पैसे तक नहीं थे। ऐसे में उन्हें टेढ़ी पुलिया से पैदल ही अपने घर की ओर जाना पड़ा। युवाओं ने इसे लेकर नाराजगी जताई और कहा कि वे अपनी रोजगार संबंधी समस्या सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एकत्र हुए थे।
युवाओं का कहना है कि तकनीकी और उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी रोजगार नहीं मिलना उनके लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है। पॉलीटेक्निक और आईटीआई जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम करने वाले युवाओं को उम्मीद रहती है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें संबंधित क्षेत्र में रोजगार मिलेगा। वहीं स्नातक और परास्नातक पास युवा भी सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
धरने में पहुंचे युवाओं ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन शुल्क, आने-जाने और पढ़ाई पर लगातार खर्च होता है। लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने पर परिवार पर आर्थिक निर्भरता बनी रहती है। इससे कई युवाओं को मानसिक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। युवाओं ने रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने और खाली पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया चलाने की मांग उठाई।
मड़ियांव के मेला मैदान में हुआ यह घटनाक्रम ज्यादा देर नहीं चला, लेकिन युवाओं के रोजगार से जुड़े सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए। युवक-युवतियों का कहना है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक संगठन से जुड़ी नहीं बल्कि रोजगार पाने से संबंधित है। वे चाहते हैं कि उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।
वहीं, सार्वजनिक स्थान पर धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े नियम लागू होते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने युवाओं से धरने की अनुमति को लेकर पूछताछ की। हालांकि युवाओं की ओर से उन्हें चौकी ले जाने और बाद में टेढ़ी पुलिया के पास छोड़ने को लेकर लगाए गए आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद युवाओं ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को शिक्षित और प्रशिक्षित बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए। उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद लंबे समय तक नौकरी की तलाश करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मड़ियांव में हुआ यह धरना इसी नाराजगी और रोजगार की मांग को सामने लाने का प्रयास था।





