उत्तर प्रदेश

एक हादसे ने खोली आंखें, छापा पड़ा तो दुकान से निकले 6 क्विंटल पटाखे

Kavita2
7 Sept 2026 5:18 PM IST
एक हादसे ने खोली आंखें, छापा पड़ा तो दुकान से निकले 6 क्विंटल पटाखे
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कानपुर। प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर मनौरी से सटे चिल्ला शहबाजी गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और 14 लोगों की मौत के बाद अवैध पटाखों के कारोबार को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। इस हादसे के बाद कानपुर पुलिस ने भी शहर में अवैध रूप से पटाखों का भंडारण और बिक्री करने वालों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इसी अभियान के तहत मूलगंज इलाके में एक दुकान पर छापेमारी के दौरान करीब छह क्विंटल अवैध पटाखे बरामद किए गए। मामले में दुकानदार सूफियान को गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार को पुलिस टीम मूलगंज क्षेत्र की रोटी वाली गली में पहुंची थी। यहां पतंग और पटाखों की एक दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखे रखे होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने दुकान की जांच की तो वहां भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण मिला। दस्तावेजों और भंडारण से संबंधित अनुमति की जांच के बाद पुलिस ने पटाखों को अवैध बताते हुए जब्त कर लिया।

बरामद पटाखों का वजन करीब छह क्विंटल बताया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे घनी आबादी और व्यावसायिक क्षेत्र में रखे जाने से गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई थी। पुलिस ने दुकान संचालक सूफियान को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मूलगंज थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

चिल्ला शहबाजी हादसे के बाद बढ़ी सतर्कता

पुलिस का यह अभियान चिल्ला शहबाजी गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद शुरू किया गया है। बीते सोमवार हुए इस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई थी। विस्फोट इतना गंभीर था कि घटना के बाद अवैध रूप से पटाखे बनाने और उनका भंडारण करने वालों को लेकर सवाल खड़े हो गए।

इस घटना को देखते हुए कानपुर पुलिस ने भी ऐसे ठिकानों की पहचान शुरू की, जहां नियमों का उल्लंघन कर पटाखों का भंडारण किए जाने की आशंका है। पुलिस की टीमों को बाजारों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

पतंग-पटाखे की दुकान में मिला बड़ा जखीरा

मूलगंज की रोटी वाली गली में हुई कार्रवाई ने अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया है। दुकान में सामान्य कारोबारी गतिविधियों के बीच इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे रखे मिले। करीब छह क्विंटल पटाखों की बरामदगी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन लोगों को बेचा जाना था।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि दुकान में कब से पटाखों का भंडारण किया जा रहा था। पुलिस संबंधित दस्तावेजों और अन्य जानकारियों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।

घनी आबादी वाले बाजार में बड़ी मात्रा में पटाखों का अवैध भंडारण आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। पटाखे अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं और छोटी सी चिंगारी या आग की घटना बड़े हादसे का रूप ले सकती है। यही वजह है कि पटाखों के निर्माण, बिक्री और भंडारण के लिए सुरक्षा मानकों और अनुमति संबंधी नियमों का पालन जरूरी होता है।

अन्य ठिकानों पर भी नजर

चिल्ला शहबाजी में हुई घटना के बाद शुरू हुए अभियान को केवल एक दुकान तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। पुलिस की नजर उन अन्य स्थानों पर भी है, जहां अवैध रूप से पटाखों का भंडारण किए जाने की आशंका है। संदिग्ध दुकानों और गोदामों की जांच की जा सकती है। विशेष रूप से घनी आबादी के बीच बड़ी मात्रा में विस्फोटक या पटाखे रखने वालों पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध पटाखों की आपूर्ति के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। सूफियान से पूछताछ के आधार पर पटाखों के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है। यदि इसमें अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

बड़े हादसे से पहले पकड़ा गया जखीरा

छह क्विंटल पटाखों की बरामदगी को सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चिल्ला शहबाजी में हुए विस्फोट ने पहले ही यह दिखा दिया है कि अवैध पटाखों का निर्माण या असुरक्षित भंडारण कितना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में रोटी वाली गली जैसे व्यस्त क्षेत्र में भारी मात्रा में पटाखों की मौजूदगी गंभीर खतरे का कारण बन सकती थी।

फिलहाल पुलिस ने बरामद पटाखों को कब्जे में लेकर दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही शहर में अवैध पटाखों के भंडारण के खिलाफ अभियान जारी रखने की तैयारी है। पुलिस की जांच में अब यह सामने आना बाकी है कि बरामद छह क्विंटल पटाखे कहां से आए थे और इनके कारोबार से कितने अन्य लोग जुड़े हुए हैं।

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