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गन्ने और धान के साथ अब फूलों से महकेंगे खीरी के खेत, किसानों को मिलेगा सरकारी लाभ

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में अब गन्ने और धान की परंपरागत खेती के साथ फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें नकदी फसलों से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत गेंदा और ग्लेडियोलस के फूलों की खेती का क्षेत्र बढ़ाया जाएगा। जिले में दोनों फूलों की खेती के लिए कुल 18 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत किसानों को बीज और अन्य रोपण सामग्री निवेश के रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। गेंदे की खेती के लिए सामान्य वर्ग के किसानों को सात हेक्टेयर और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को तीन हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। जिले में पहले से 15 से अधिक किसान गेंदे की खेती कर रहे हैं। शादी-विवाह और त्योहारों के दौरान फूलों की मांग बढ़ने से किसान इसे अतिरिक्त आमदनी के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
18 हेक्टेयर में फूलों की खेती का लक्ष्य
मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत लखीमपुर खीरी में फूलों की खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए गेंदा और ग्लेडियोलस की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। दोनों फसलों के लिए कुल 18 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को परंपरागत फसलों के अलावा आय के दूसरे विकल्प उपलब्ध कराना है।
जिले में गन्ना और धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। अब फूलों की खेती को भी किसानों की कृषि गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
उद्यान विभाग की मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत जिले को वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न उद्यानिकी गतिविधियों के लक्ष्य भी आवंटित किए गए हैं।
गेंदे की खेती के लिए 10 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित
योजना के अनुसार, गेंदे के फूलों की खेती के लिए कुल 10 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है।
इसमें सामान्य वर्ग के किसानों के लिए सात हेक्टेयर और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिए तीन हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न वर्गों के किसानों को फूलों की खेती से जोड़ना है।
गेंदे की खेती का विस्तार होने से जिले में फूलों का स्थानीय उत्पादन बढ़ सकता है।
हालांकि, योजना के तहत कितने किसानों का चयन किया जाएगा, इसकी संख्या उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है।
जिले में पहले से 15 से अधिक किसान उगा रहे गेंदा
लखीमपुर खीरी में फूलों की खेती पूरी तरह नई नहीं है। जिले में 15 से अधिक किसान पहले से गेंदे के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं।
इन किसानों ने परंपरागत फसलों के साथ फूलों की खेती को भी अपनाया है।
गेंदे का उपयोग धार्मिक आयोजनों, शादी-विवाह, त्योहारों और सजावट के कार्यों में किया जाता है।
इन अवसरों पर फूलों की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज बेचने के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, फूलों की बिक्री से होने वाली आमदनी बाजार भाव, उत्पादन लागत और मांग पर निर्भर करती है।
गन्ने के साथ सहफसली खेती से अतिरिक्त आमदनी
जिले में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए फूलों की सहफसली खेती भी एक विकल्प के रूप में सामने आ रही है।
सहफसली खेती में मुख्य फसल के साथ दूसरी फसल उगाई जाती है।
उपयुक्त परिस्थितियों में गन्ने के साथ गेंदे की खेती करके किसान अपनी जमीन से अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, इसके लिए फसलों के बीच पर्याप्त दूरी, सिंचाई, पोषण और धूप की उपलब्धता का ध्यान रखना जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फसल का चयन करने से किसानों को खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
ग्लेडियोलस की खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
गेंदे के अलावा जिले में ग्लेडियोलस की खेती का क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
ग्लेडियोलस एक सजावटी फूल है, जिसका उपयोग गुलदस्तों, फूलों की सजावट और विभिन्न समारोहों में किया जाता है।
इसकी खेती के लिए उपयुक्त मौसम, मिट्टी और सिंचाई व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
ग्लेडियोलस की खेती आमतौर पर कंदनुमा रोपण सामग्री के माध्यम से की जाती है।
किसानों को फूलों की गुणवत्ता और बाजार की मांग का ध्यान रखते हुए उत्पादन की योजना बनानी होती है।
गेंदे के लिए निर्धारित 10 हेक्टेयर को घटाने पर कुल लक्ष्य में आठ हेक्टेयर शेष रहते हैं, लेकिन ग्लेडियोलस का आधिकारिक वर्गवार आवंटन उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं किया गया है।
किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी रोपण सामग्री
योजना के अंतर्गत किसानों को फूलों की खेती के लिए बीज अथवा निर्धारित रोपण सामग्री निवेश के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे किसानों को खेती शुरू करने में प्रारंभिक सहायता मिल सकेगी।
फूलों की व्यावसायिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री महत्वपूर्ण होती है।
सही किस्म का चयन, उचित समय पर बुवाई और फसल की देखभाल से बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ती है।
हालांकि, योजना के तहत प्रति हेक्टेयर कितनी राशि की सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
शादी-विवाह और त्योहारों में बढ़ती है मांग
गेंदे के फूलों की मांग विशेष रूप से शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान बढ़ती है।
फूलों का उपयोग मालाएं बनाने, पूजा-अर्चना और सजावट में किया जाता है।
इस कारण किसान बाजार की मांग को देखते हुए फूलों की खेती की योजना बना सकते हैं।
वहीं ग्लेडियोलस जैसे फूलों का इस्तेमाल सजावटी गुलदस्तों और आयोजनों में किया जाता है।
हालांकि, त्योहारों के मौसम में फूलों की कीमतें हमेशा ऊंची रहेंगी, इसकी गारंटी नहीं होती। बाजार में आवक बढ़ने पर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।
इसलिए किसानों के लिए उत्पादन के साथ बिक्री की योजना बनाना भी जरूरी है।
चार विकासखंडों में संचालित हो रही उद्यानिकी योजना
मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के अंतर्गत जिले के बेहजम, कुंभी गोला, बिजुआ और पलिया विकासखंडों को विभिन्न उद्यानिकी गतिविधियों के लिए शामिल किया गया है।
उद्यान विभाग ने योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र किसानों से ऑनलाइन पंजीकरण कराने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की अपील की थी।
हालांकि, इन चार विकासखंडों में से किन क्षेत्रों को गेंदा और ग्लेडियोलस के नए लक्ष्य में शामिल किया जाएगा, इसका अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।
परंपरागत खेती से आगे बढ़ने की पहल
लखीमपुर खीरी कृषि प्रधान जिला है। यहां गन्ना, धान और गेहूं जैसी फसलें प्रमुखता से उगाई जाती हैं।
अब उद्यानिकी गतिविधियों के विस्तार से किसानों को दूसरी फसलें अपनाने के अवसर दिए जा रहे हैं।
फूलों की खेती के अलावा फल, सब्जियों और अन्य बागवानी फसलों में भी किसानों की रुचि बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत उद्यानिकी गतिविधियों पर अनुदान संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।
फूलों की खेती में बाजार की व्यवस्था अहम
फूलों की खेती से किसानों को लाभ मिले, इसके लिए उत्पादन के साथ बाजार की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
फूल जल्दी खराब होने वाली उपज हैं। इसलिए कटाई के बाद समय पर बिक्री और परिवहन जरूरी होता है।
किसानों को स्थानीय फूल विक्रेताओं, थोक व्यापारियों और आयोजन संबंधी व्यवसायों की मांग को ध्यान में रखना पड़ सकता है।
इससे उन्हें उत्पादन की मात्रा और कटाई का समय निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद
मुख्यमंत्री औद्यानिक विकास योजना के तहत गेंदा और ग्लेडियोलस की खेती के लिए निर्धारित 18 हेक्टेयर का लक्ष्य जिले में फूलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
किसानों को बीज और रोपण सामग्री उपलब्ध कराने से नए किसानों को इस व्यवसाय से जुड़ने में मदद मिल सकती है।
विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए परंपरागत खेती के साथ उपयुक्त नकदी फसलों को अपनाना अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।
फिलहाल जिले में 15 से अधिक किसान गेंदे की खेती कर रहे हैं। अब विभाग का लक्ष्य इस दायरे को बढ़ाना है।
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित 18 हेक्टेयर क्षेत्र में कितने किसान फूलों की खेती अपनाते हैं और उन्हें बाजार से कितना आर्थिक लाभ मिलता है।





