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उत्तर प्रदेश
जौहर विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल का आरोप, आजम पर नया मामला
nidhi
16 Oct 2026 7:35 AM IST

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जौहर ट्रस्ट मामले में उठे नए सवाल
रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के मामले में नई प्राथमिकी दर्ज होने के बाद परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आजम खां के साथ जौहर ट्रस्ट को भी नामजद किया गया है। मामला विश्वविद्यालय निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा है।
13 अक्टूबर को दर्ज प्राथमिकी के बाद ट्रस्ट के संचालन और निर्णय लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। आजम खां के अलावा उनकी पत्नी तजीन फातिमा, बेटे अदीब और अब्दुल्ला तथा बहन निकहत अफलाक अलग-अलग समय पर ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं। हालांकि, केवल पारिवारिक संबंध या ट्रस्ट की सदस्यता के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं होती। संबंधित भूमिका और आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में होनी है।
ट्रस्ट की कार्यकारिणी में पहले बदलाव भी हो चुका है। जनवरी 2026 में आजम खां, तजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम के पदों से अलग होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को सचिव की जिम्मेदारी दी गई। ट्रस्ट जौहर विश्वविद्यालय और रामपुर पब्लिक स्कूलों का संचालन करता है। उस समय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने नई कार्यकारिणी के गठन की पुष्टि की थी। नई प्राथमिकी में आरोप है कि कुछ ठेकेदारों ने सरकारी परियोजनाओं के लिए खरीदी गई निर्माण सामग्री का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया। जांच एजेंसी ने सरकारी ठेकों और ट्रस्ट को मिले दान के बीच कथित संबंध का भी उल्लेख किया है। इन आरोपों में ठेके हासिल करने, सामग्री उपलब्ध कराने और बाद में दान देने वाले पक्षों के लेनदेन का विषय शामिल है।
प्राथमिकी संबंधी विवरण में एक कंपनी के जरिए कम से कम 55.80 करोड़ रुपये का सार्वजनिक धन विश्वविद्यालय तक पहुंचने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा सरकारी निर्माण कार्यों में 23.41 करोड़ रुपये और विधायक व विधान परिषद क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। एजेंसी ने इन मदों को मिलाकर 85.81 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का दावा किया है। ये जांच पक्ष के आरोप हैं, जिन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी में परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य पदाधिकारी भी शामिल हैं। जनवरी में हुए बदलाव के दौरान मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष, नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव और जावेद उर रहमान खां को कोषाध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी आई थी। ऐसे में ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों में किसकी क्या भूमिका रही, यह मामले का अहम पहलू है। फिलहाल नई प्राथमिकी को पूरे परिवार के दोषी होने या सभी के खिलाफ कार्रवाई तय होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। जांच का विषय विश्वविद्यालय निर्माण में धन और संसाधनों के कथित दुरुपयोग तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका है। आगे की कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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