- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- पंचायत भवन निर्माण में...
पंचायत भवन निर्माण में लापरवाही का आरोप, पांच साल बाद भी अधूरा काम

बनिहार: पंचायत स्तर पर ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे पंचायत भवन का निर्माण कार्य वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। बनिहार में 14वें वित्त आयोग की राशि से वर्ष 2019-20 में पंचायत भवन निर्माण के लिए 24 लाख रुपये निकाले गए थे, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी भवन अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य में हुई देरी और कथित अनियमितताओं के कारण अब तैयार हिस्सा भी खराब होने लगा है।
जानकारी के अनुसार, पंचायत भवन निर्माण के लिए स्वीकृत राशि जारी होने के बाद कार्य शुरू किया गया था। भवन का ढांचा तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन कई महत्वपूर्ण काम अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। भवन में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है और मुख्य गेट का काम भी अधूरा है। इसके अलावा दरवाजों पर पल्ले नहीं लगाए गए हैं और बिजली व्यवस्था के लिए वायरिंग का काम भी नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन का उद्देश्य स्थानीय लोगों को पंचायत संबंधी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना था, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। भवन तैयार नहीं होने से पंचायत स्तर के कई कार्यों के संचालन में भी परेशानी हो रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस भवन को लंबे समय तक उपयोग में लाया जाना था, वह निर्माण पूरा होने से पहले ही खराब होने लगा है। भवन की दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं और कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ चुका है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी पंचायत भवन उपयोग के लायक नहीं बन पाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कराई जाए और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि पंचायत भवन निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड की पत्रावली भी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कार्यालयी रिकॉर्ड में निर्माण कार्य से जुड़ी पूरी फाइल नहीं मिल रही है। इससे योजना की स्वीकृति, भुगतान और कार्य प्रगति से जुड़े दस्तावेजों की जांच में भी परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर निगरानी की जाती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होती, तो आज पंचायत भवन की यह स्थिति नहीं होती। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की उदासीनता के कारण सरकारी धन का सही उपयोग नहीं हो पाया।
वहीं, पंचायत स्तर के अधिकारियों से जब इस मामले में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि, ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएगा और अधूरे निर्माण को जल्द पूरा कराया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायत भवन जैसे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में समय पर निगरानी और नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी होता है। यदि निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरा छोड़ दिया जाता है तो न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि भवन की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
14वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था। पंचायत भवन जैसे प्रोजेक्ट से ग्रामीणों को प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिलनी थीं। लेकिन बनिहार में निर्माण कार्य अधूरा रहने से योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो सका है।
अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अधूरे कार्य को जल्द पूरा कराया जाए, भवन की मरम्मत कराई जाए और निर्माण में हुई किसी भी तरह की अनियमितता की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
फिलहाल मामला जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है। पांच साल से अधूरे पड़े इस पंचायत भवन को लेकर ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।





