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इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद नाबालिग छात्र से जबरन शादी का आरोप

पलामू। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए हुई दोस्ती के बाद 17 वर्षीय छात्र को कथित रूप से दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर जबरन शादी कराने का मामला सामने आया है। नाबालिग छात्र ने पलामू बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष दिए अपने बयान में पंडवा थाना क्षेत्र की रहने वाली 20 वर्षीय युवती, उसकी मां और मामा समेत अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र के बयान के आधार पर बाल कल्याण समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिस को कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्र की उम्र 17 वर्ष है और वह राजस्थान के उदयपुर स्थित एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ाई करता है। छात्र ने सीडब्ल्यूसी को बताया कि कुछ समय पहले उसकी पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से पंडवा थाना क्षेत्र की 20 वर्षीय युवती से हुई थी। सोशल मीडिया पर बातचीत शुरू होने के बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा। छात्र का आरोप है कि इसी जान-पहचान के बाद घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया, जिससे वह दबाव और भय की स्थिति में आ गया।
छात्र ने अपने बयान में आरोप लगाया कि युवती और उसके परिजनों ने उस पर शादी करने का दबाव बनाया। जब उसने शादी को लेकर आपत्ति जताई तो कथित तौर पर उसे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। छात्र का दावा है कि डर और दबाव बनाकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी कराई गई। उसने इस पूरे घटनाक्रम में युवती के अलावा उसकी मां, मामा और कुछ अन्य लोगों की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है।
मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण बाल कल्याण समिति ने छात्र के बयान को गंभीरता से लिया। सीडब्ल्यूसी ने मामले में रांची जिले के बुंडू थाना प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार जांच और कार्रवाई करने का आदेश दिया था। अब पुलिस जांच में ही छात्र द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
छात्र ने समिति के समक्ष अपनी बात रखते हुए बताया कि वह पढ़ाई के लिए राजस्थान के उदयपुर में रहता है। इंस्टाग्राम पर हुई सामान्य बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई थी। आरोप है कि बाद में इसी दोस्ती को आधार बनाकर उस पर शादी के लिए दबाव बनाया जाने लगा। छात्र के अनुसार, जब उसने अपनी उम्र और पढ़ाई का हवाला देते हुए शादी के लिए सहमति नहीं दी तो उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी दी गई।
नाबालिग ने यह भी आरोप लगाया कि धमकियों के कारण वह मानसिक दबाव में आ गया था और अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय नहीं ले पाया। इसके बाद कथित रूप से उससे जबरन शादी कराई गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। युवती और उसके परिजनों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
बाल कल्याण समिति की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि छात्र की उम्र 18 वर्ष से कम बताई गई है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में उनकी सुरक्षा, देखभाल और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाती है। सीडब्ल्यूसी के सामने बयान आने के बाद समिति ने संबंधित पुलिस को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया, ताकि छात्र के आरोपों की कानूनी रूप से जांच की जा सके।
मामले में पुलिस के सामने कई पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। छात्र और युवती के बीच इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत, दोनों के संपर्क में आने की परिस्थितियां, कथित धमकी से जुड़े डिजिटल या अन्य साक्ष्य, शादी से संबंधित दस्तावेज और घटनाक्रम के दौरान मौजूद लोगों के बयान जांच का हिस्सा हो सकते हैं। इसके साथ ही छात्र की उम्र से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज भी महत्वपूर्ण होंगे।
यह मामला सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले संबंधों और नाबालिगों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े करता है। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क के दौरान व्यक्तिगत जानकारी साझा करना या बिना पर्याप्त जानकारी के किसी संबंध में आगे बढ़ना कई बार जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में अभिभावकों और संबंधित संस्थाओं की सतर्कता महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल छात्र की ओर से लगाए गए सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित तौर पर छात्र पर किस तरह का दबाव बनाया गया और शादी किन परिस्थितियों में हुई। सीडब्ल्यूसी के निर्देश के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।





