उत्तर प्रदेश

पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी से मारपीट का आरोप, देखरेख में लगे डॉक्टर को हटाया

Kavita2
7 Sept 2026 11:14 AM IST
पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी से मारपीट का आरोप, देखरेख में लगे डॉक्टर को हटाया
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वाराणसी। रोगियों की सेवा के लिए लंबे समय तक समर्पित रहे पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. टीके लाहिड़ी के साथ बीएचयू अस्पताल में कथित तौर पर दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कदम उठाया है। प्रो. लाहिड़ी की देखरेख में लगाए गए चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए गठित चिकित्सकों की कमेटी भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे जल्द ही विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपे जाने की संभावना है। हालांकि बीएचयू प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताया है।

मामला उस समय सामने आया जब प्रो. लाहिड़ी की एक रिश्तेदार की ओर से बीएचयू प्रशासन को ई-मेल भेजकर गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत में डॉ. अरविंद पांडेय पर कथित तौर पर गाली-गलौज करने और थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया। शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी।

विवाद बढ़ने के बाद डॉ. अरविंद पांडेय को प्रो. लाहिड़ी की देखरेख की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। हालांकि इस कार्रवाई को आरोप साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मामले की वास्तविक स्थिति जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आरोपों को निराधार बताया गया है। इसके बावजूद मामले की गंभीरता और वरिष्ठ चिकित्सक से जुड़े होने के कारण जांच के लिए डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई। कमेटी संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाकर घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों, अस्पताल के कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध अन्य तथ्यों को देखा जा सकता है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन उसके आधार पर आगे का निर्णय लेगा।

इस बीच रविवार को मामला राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर प्रो. टीके लाहिड़ी का हालचाल जाना। नेताओं ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और बेहतर इलाज सुनिश्चित किए जाने की बात कही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल भी रविवार को बीएचयू अस्पताल पहुंचे। उन्होंने प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को उनके बेहतर उपचार के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

रवींद्र जायसवाल ने मुलाकात के बाद घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उनके मुताबिक उन्होंने खुद प्रो. लाहिड़ी से कथित मारपीट की घटना के बारे में पूछा। इस पर वरिष्ठ चिकित्सक हंस पड़े और उन्होंने सवाल किया कि ऐसी अफवाहें कौन फैला रहा है।

मंत्री की ओर से बताई गई प्रो. लाहिड़ी की यह प्रतिक्रिया शिकायत में लगाए गए आरोपों से अलग तस्वीर पेश करती है। एक तरफ रिश्तेदार की ई-मेल शिकायत में गाली-गलौज और थप्पड़ मारने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी तरफ मंत्री के मुताबिक स्वयं प्रो. लाहिड़ी ने बातचीत के दौरान ऐसी बातों को लेकर आश्चर्य जताया।

इसी विरोधाभास के कारण जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अस्पताल में वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ था और शिकायत में लगाए गए आरोपों का आधार क्या है।

बीएचयू प्रशासन के लिए भी यह मामला संवेदनशील है। प्रो. टीके लाहिड़ी चिकित्सा जगत का जाना-पहचाना नाम हैं और रोगियों की सेवा के लिए उनकी अलग पहचान रही है। उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक से कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद स्वाभाविक रूप से इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

मामले में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले जांच के परिणाम का इंतजार जरूरी है। शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और संबंधित चिकित्सक का दोष साबित होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

विश्वविद्यालय की ओर से जांच कमेटी गठित करना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। कमेटी यह देख सकती है कि घटना के समय कौन-कौन मौजूद था, संबंधित चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों का क्या कहना है और शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की पुष्टि किसी अन्य माध्यम से होती है या नहीं।

यदि अस्पताल के संबंधित हिस्से में सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं तो उनकी रिकॉर्डिंग भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर घटना की समयरेखा समझने का प्रयास किया जा सकता है।

प्रो. लाहिड़ी की रिश्तेदार की शिकायत और विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख में अंतर होने के कारण मामले में तथ्यों की पुष्टि और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपों को निराधार बता रहा है, लेकिन निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों की कमेटी बनाई गई है।

राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल की अस्पताल यात्रा ने मामले को और प्रमुखता दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अस्पताल पहुंचे मंत्री ने प्रो. लाहिड़ी के इलाज और स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

भाजपा के अलावा कांग्रेस नेताओं के अस्पताल पहुंचने से मामला राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। हालांकि मूल प्रश्न अभी भी यही है कि कथित घटना वास्तव में हुई थी या शिकायत किसी गलतफहमी अथवा अन्य परिस्थितियों के कारण सामने आई।

प्रो. लाहिड़ी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की प्राथमिकता उनके इलाज और देखभाल पर बनी हुई है। डॉ. अरविंद पांडेय को उनकी देखरेख की जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

अब जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन यह तय करेगा कि मामले में किसी और कार्रवाई की आवश्यकता है या शिकायत में लगाए गए आरोपों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

इस पूरे प्रकरण में प्रो. लाहिड़ी की प्रतिक्रिया भी बेहद अहम है। मंत्री रवींद्र जायसवाल के मुताबिक उन्होंने कथित घटना के बारे में पूछे जाने पर हंसते हुए अफवाह फैलाए जाने की बात कही। ऐसे में जांच कमेटी के सामने शिकायत, प्रशासन के दावे और संबंधित लोगों के बयानों को मिलाकर वास्तविक घटनाक्रम सामने लाने की जिम्मेदारी है।

फिलहाल डॉ. अरविंद पांडेय को प्रो. टीके लाहिड़ी की देखरेख से हटा दिया गया है और जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है। रिपोर्ट आने के बाद ही कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों की वास्तविकता अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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