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Aligarh: 1 रुपये गज में मिली ज़मीन पर बस गए हजारों, अब खड़ा हुआ हक का सवाल

अलीगढ़: वक्फ संशोधन बिल के बाद अब वक्फ संपत्तियों के मालिकाना हक की चिंता उन पर रह रहे लोगों को सताने लगी है। अपने अलीगढ़ जिले में सरकारी रिकार्ड में दर्ज 1216 वक्फ संपत्तियां हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल शाहजमाल की सबसे बड़ी उस वक्फ संपत्ति को लेकर है। जिस पर 1 रुपये प्रतिगज के पट्टों के जरिये 45 हजार से अधिक परिवार बसा दिए गए। प्रशासन ने अपने कई सर्वे में इन 45 हजार मकानों को कब्जा माना। मगर आज तक उन पर कोई निर्णय नहीं हुआ। अब कानून बदलाव के बाद उनके भविष्य पर क्या निर्णय होगा? ये सवाल उस आबादी में ज्वलंत है।
सरकारी रिकार्ड के अनुसार वक्फ नंबर 63 पर दर्ज दरगाह हजरत सम्शुल आरफीन शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्ति जिले की कुल 1216 वक्फ संपत्तियों में सबसे बड़ी संपत्ति है। इस संपत्ति का किस कदर बंदरबाट हुआ है कि 250 कच्चा बीघा से अधिक खाली जमीन सिकुड़ कर चंद टुकड़ों में रह गई। इस पर कब्जे की शुरूआत 1971-72 के आसपास हुई। उस समय के मुतवल्ली ने यहां 1 रुपये प्रतिगज के हिसाब से कमजोर/गरीब वर्ग को छोटे प्लाटों के 99 साल के पट्टे किए। शुरूआत में झोपड़ियां बनीं। फिर कच्ची इबारत और बाद में मकान-बिल्डिंगें खड़ी हो गईं। पट्टों के सहारे मकान बनाने वालों ने नगर निगम को गृहकर देकर गृहकर की रसीद लीं। उसकी मदद से बिजली संयोजन, अन्य पहचान पत्र, मतदाता कार्ड आदि से उनकी पहचान बन गई।
शाहजमाल वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को लेकर पूर्व में गई रिपोर्ट पर कोई निर्देश आया था इसकी जानकारी नहीं है। अब बदली स्थितियों को लेकर जो भी निर्देश प्राप्त होंगे उसके अनुसार कार्रवाई तय की जाएगी। - अवनेश कुमार, तहसीलदार कोल
मलबे के बैनामे से ये और मजबूत हुए: जानकार बताते हैं कि पट्टे के आधार पर बसे परिवारों में जब पीढ़ी बदली और भाइयों के बीच बंटवारे हुए तो जमीन का बंटवारा नहीं हुआ। न बैनामा हुआ। बल्कि उस जमीन पर बने कच्चे या पक्के मकान के मलबे का बैनामा या बंटवारा हुआ। उसी मलबे की वसीयत तैयार हुई। क्योंकि पट्टे के मकान या प्लाट का बैनामा नहीं होता, बल्कि उस पर बने भवन के मलबे का बैनामा होगा। उसी बैनामे के आधार पर लोग अब मालिकाना हक भी जताने लगे हैं।
अदालतों में चल रहे मुकदमे: शाहजमाल कब्रिस्तान के 2017 से मुतवल्ली मुईन अहमद बताते हैं कि उनके कार्यकाल में सिर्फ एक 150 गज के प्लाट पर कब्जा हुआ, जिसकी शिकायत कर कार्रवाई कराई गई। मुईन बताते हैं कि कब्जे या पट्टे के जो भी मामले हैं, वे हमसे पहले के हैं। इन्हें लेकर वक्फ ट्रिब्युनल और स्थानीय अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। उन पर हम पैरोकारी कर रहे हैं। प्रशासनिक सर्वे में 45 हजार कब्जे माने गए। जिन पर कार्रवाई की संस्तुति भी समय समय पर मांगी गई। मगर आज तक कोई जवाब नहीं आया। अब बदली स्थितियों में क्या तय होगा। इसका हमें भी इंतजार है।
खूनी रंजिश में हिस्ट्रीशीटर नौशे-चंदा की हुई हत्या: अलीगढ़ शाहजमाल की इस संपत्ति पर खूनी रंजिशें भी उभरीं। जिसका कारण बना बाद के मुतवल्लियों द्वारा पट्टेदारों से वसूली करना। जब यहां के दबंग हिस्ट्रीशीटर नौशे ने वसूली का विरोध किया तो नौशे की उसके साथी चंदा सहित हत्या कर दी गई। तब इस संपत्ति का विवाद खासा सुर्खियों में रहा।
इस संपत्ति के पूर्व मुतवल्ली ग्यासुद्दीन पर वर्ष 2015 में हिस्ट्रीशीटर नौशे-चंदा की हत्या कराने का आरोप लगा। जांच में उजागर हुआ कि ग्यासुद्दीन ने पट्टे बनाकर रह रहे लोगों से रुपये मांगे। जिसमें इसी संपत्ति पर बनी मार्केट की दुकानों से रुपये मांगे गए। जिसका इसी संपत्ति पर बसे दबंग अपराधी नौशे ने यह कहकर विरोध किया कि पट्टे गलत नहीं। इस पर कई बार झगड़े हुए। जिसके बाद दोनों साथियों की एक साथ हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में 2022 में ग्यासुद्दीन को उम्रकैद व हत्या में शामिल पांच लोगों को फांसी की सजा हुई। फांसी पर बाद में हाईकोर्ट से राहत मिली। इससे पहले यहां के मुतवल्ली हस्सू पहलवान पर भी एक हत्या का आरोप लगा और उन्हें भी उम्रकैद की सजा हुई। उस हत्या में भी इसी तरह के कब्जे से जुड़ा विवाद था। जानकार बताते हैं कि विवाद की शुरूआत या तो किसी के कब्जा करने पर या फिर मुतवल्ली द्वारा पट्टाधारकों से धन वसूली के आरोपों पर होती है। जिसमें अक्सर थाना पुलिस पर भी आरोप लगते हैं।
ये हुई अब तक कार्रवाई
-वर्ष 2008 में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने सर्वे में यहां 45 हजार कब्जे माने।
-वर्ष 2020 में भी इस संपत्ति पर कब्जे माने। दोनों बार रिपोर्ट वक्फ बोर्ड को भेजी गई।
-दोनों सर्वे रिपोर्ट में या तो इन्हें रेग्यूलराइज कर किराया लेने या फिर इन्हें हटाने की संस्तुति मांगी।
ये हैं खास तत्थ्य
-7 से ज्यादा खातों में 63 नंबर वक्फ संपत्ति राजस्व में दर्ज
-250 कच्चा बीघा से अधिक की संपत्ति कई टुकड़ों में यहां
-1971-72 में तत्कालीन मुतवल्ली ने किए गरीबों को पट्टे
-45 हजार के आसपास मकान इस संपत्ति पर बने हैं अब
-30 से ज्यादा मुकदमे वक्फ ट्रिब्युनल लखनऊ में लंबित
-12 करीब मुकदमे स्थानीय न्यायालयों में भी लंबित पड़े हैं
ये भी जानें
63 नंबर वक्फ की कुछ संपत्ति धौर्रा व जमालपुर में भी है। जमालपुर में एएमयू को जमीन दान दी गई, जबकि धौर्रा की भूमि पर कुछ मकान बने।





