उत्तर प्रदेश

Aligarh: टैक्स वसूली की कार्रवाई से लोगों में रोष

Admindelhi1
24 Dec 2025 3:37 PM IST
Aligarh: टैक्स वसूली की कार्रवाई से लोगों में रोष
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अलीगढ़: नगर निगम की टैक्स वसूली कार्रवाई ने मानवता और संवेदनशील प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊपरकोट क्षेत्र के मोहल्ला आतिश बाजान में मंगलवार सुबह उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नगर निगम की टीम ने बिना मौके पर कोई चेतावनी दिए एक आवास को बाहर से सील कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि जिस समय सीलिंग की गई, उस वक्त मकान के अंदर दंपती और उनका सात साल का मासूम बेटा मौजूद था, जो स्कूल जाने की तैयारी कर रहा था।

जानकारी के अनुसार अफसर अली के मकान पर 94 हजार रुपये संपत्ति कर बकाया बताया गया था। सुबह सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दरवाजे पर सील लगा दी। उस समय अफसर अली का बेटा शहबाज, बहू गुलख्शां और कक्षा एक में पढ़ने वाला बेटा कामरान घर के भीतर थे। सील लगते ही तीनों घर में कैद हो गए। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा और अंदर फंसा बच्चा रोता-बिलखता रहा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे प्रशासन की किरकिरी हो रही है।

परिवार के अनुसार वे लगातार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे कि कम से कम बच्चे को स्कूल जाने दिया जाए, लेकिन दो घंटे तक किसी ने उनकी नहीं सुनी। सूचना पर पहुंचे स्थानीय पार्षद अब्दुल मुत्तलिब ने भी सहायक नगर आयुक्त से सील हटाने की अपील की, यह कहते हुए कि टैक्स विवाद पर आपत्ति पहले ही नगर निगम में दाखिल है और उस पर विचार चल रहा है, लेकिन अधिकारी टस से मस नहीं हुए। आरोप है कि सहायक नगर आयुक्त अपनी गाड़ी से उतरने तक को तैयार नहीं हुए।

आखिरकार अफसर अली ने किसी तरह पांच हजार रुपये अपने पास से और पांच हजार रुपये आसपास के लोगों से उधार लेकर जमा किए। शेष राशि किस्तों में देने के आश्वासन पर करीब दो घंटे बाद सील खोली गई, तब जाकर परिवार को राहत मिली। तब तक मासूम कामरान स्कूल नहीं जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि टैक्स वसूली के नाम पर इस तरह किसी परिवार को घर में बंद कर देना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि कानून और संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है।

नगर निगम का पक्ष है कि इलाके में बड़े पैमाने पर टैक्स बकाया है और नियमानुसार कार्रवाई की गई, जबकि पार्षद और स्थानीय नागरिक इसे प्रशासनिक हठधर्मिता और संवेदनहीनता बता रहे हैं। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि वसूली के दबाव में प्रशासन किस हद तक जा सकता है, और आम आदमी, खासकर बच्चे, उसकी कीमत कैसे चुकाते हैं।

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