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उत्तर प्रदेश
अखिलेश यादव ने महंगाई और बेरोजगारी पर केंद्र की नीतियों पर जताई नाराजगी
SHIDDHANT
19 Oct 2025 8:52 PM IST

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Uttar Pradesh. उत्तर प्रदेश। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इटावा में दिवाली के मौके पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य की वर्तमान आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी ने आम जनता की दिवाली की खुशियों को प्रभावित किया है। अखिलेश यादव ने कहा, “भाजपा जाए तो निवेश आए, भाजपा जाए तो तरक्की आए। भाजपा जाए तो रोजगार आए और महंगाई कम हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण गरीब और मध्यम वर्ग की दिवाली पहले जैसी खुशहाल नहीं रही। उन्होंने कहा कि पहले के समय लोग दिवाली पर एक-दूसरे को गिन्नी और सोने का सामान देते थे, लेकिन आज आम आदमी पूजा के लिए चांदी का सिक्का भी नहीं खरीद पा रहा।
उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे ताकतवर देश भी भारत पर टैरिफ लगा रहा है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल नीति की कमी नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का भी परिणाम है, जिसने आम नागरिक के हित को पीछे रख दिया है। सपा प्रमुख ने बेरोजगारी पर भी चिंता जताई और कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे। उन्होंने यह भी कहा कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सुधार की आवश्यकता है, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार को आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और दिवाली जैसे पवित्र पर्व पर लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह सुझाव दिया कि महंगाई कम करने, रोजगार बढ़ाने और सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। भारी संख्या में उपस्थित लोगों ने अखिलेश यादव के भाषण का समर्थन किया और उनकी बातों को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि दिवाली के अवसर पर इस तरह की व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा होना आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे जनता की जिंदगी और खुशहाली से जुड़ा हुआ है।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी भविष्य में ऐसे कदम उठाएगी जो आम जनता के हित में होंगे और महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसी समस्याओं का समाधान करेंगे।अखिलेश यादव के भाषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि दिवाली का पर्व केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर जनता की चिंता और नेताओं की जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से समाज और देश की भलाई के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया।
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